बलरामपुर. बलरामपुर जिले के ग्राम तोरफा निवासी 10 वर्षीय बालक बृजेश कुमार पाल की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इस हृदयविदारक घटना का मुख्य आरोपी 19 वर्षीय रवि पाल है, जिसने एक अपचारी बालक के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपियों ने यह योजना बनाई थी कि बालक को किडनैप कर उसके पिता से फिरौती वसूल करेंगे।
घटना की शुरुआत तब हुई जब दो अक्टूबर की शाम बृजेश पाल के घरवाले घर पर मौजूद नहीं थे। इसी दौरान विधि से संघर्षरत (नाबालिग अपराधी) बालक उसे खेलने के बहाने जंगल की ओर ले गया, जहाँ पहले से रवि पाल मौजूद था। फिरौती के उद्देश्य से बालक को जंगल के अंदर ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन बृजेश ने इसका विरोध किया। विरोध करते देख रवि पाल ने पहले उसके गले को हाथों से दबाया और जब उससे बालक की जान नहीं गई तो उसकी शर्ट से गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी रवि पाल और अपचारी बालक दोनों ने मिलकर शव को जंगल में फेंक दिया। पाँच दिनों बाद, छह अक्टूबर को बृजेश का सड़ा-गला शव मिला। पुलिस ने गाँव वालों से पूछताछ की, जिसमें रवि पाल का नाम संदेह के घेरे में आया। वह लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था, जिससे पुलिस का शक और गहरा हो गया। आखिरकार कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना अपराध कबूल कर लिया।
रवि पाल ने स्वीकार किया कि बृजेश के पिता द्वारा कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल खरीदने की योजना की चर्चा सुनकर उसे लगा कि उनके पास अच्छी-खासी नकदी होगी। इसी लालच में उसने और अपचारी बालक ने फिरौती वसूलने की योजना बनाई। लेकिन बालक के विरोध के चलते योजना विफल हो गई और हत्या हो गई। हत्या के बाद, लगातार गांव में खोजबीन और पुलिस के दबाव के चलते आरोपी फिरौती मांगने का साहस नहीं जुटा पाए।
पुलिस के अनुसार, शव ढलान वाले स्थान पर पाया गया था, और अत्यधिक जोर से गला दबाने के कारण वह हिस्सा सबसे पहले सड़ने लगा था। गलने की वजह से गला अलग हो गया, जिससे यह भ्रम हुआ कि हत्या गला काटकर की गई थी, जबकि यह सच नहीं था।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते अपराध और बच्चों के प्रति हो रही हिंसा को उजागर करती है। पुलिस की तत्परता से आरोपियों की गिरफ्तारी हो गई है, लेकिन यह घटना लोगों के मन में गहरा आघात छोड़ गई है।


