राजनांदगांव जिले में पुलिस आरक्षक भर्ती में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद शासन ने आखिरकार इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। यह मामला राजनांदगांव शहर की आठवीं बटालियन से जुड़ा है, जहां 16 नवंबर 2024 से 630 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। भर्ती में 60,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, लेकिन डेटा एंट्री में गड़बड़ी के कारण प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
इस भर्ती प्रक्रिया में हैदराबाद की कंपनी ‘टाइमिंग टेक्नोलॉजी’ द्वारा नियुक्त 400 रुपये मानदेय पर डेटा ऑपरेटरों से दक्षता परीक्षा के अंक दर्ज किए जा रहे थे। शिकायतें आईं कि इन डेटा ऑपरेटरों ने अभ्यर्थियों के अंक बढ़ा दिए थे। हरिभूमि अखबार ने इस गड़बड़ी को उजागर किया, जिसके बाद राजनांदगांव पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इस मामले में चार पुलिसकर्मी, दो डेटा एंट्री कर्मचारी और एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया गया था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन दिवस पर इस मामले में गड़बड़ी को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के आदेश पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी प्रकार की अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
इस मामले में लगभग 4,000 अभ्यर्थियों के अंकों में गड़बड़ी पाई गई थी, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अन्य जिलों में भी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, हालांकि अन्य जिलों में ऐसी शिकायतें नहीं आईं हैं।
इस प्रक्रिया में शामिल एक पुलिस आरक्षक ने आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद जांच में आरोप लगे थे कि भर्ती में अधिकारियों की संलिप्तता हो सकती है। इस घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और दोषियों को पकड़ने के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय राज्य में भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

