बीमा क्लेम का आधा अधूरा भुगतान करना पड़ा भारी, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना
रायगढ़. बीमा कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए भारतीय न्यायपालिका हमेशा सक्रिय रहती है। हाल ही में एक मामला सामने आया है, जिसमें बिलासपुर की स्टार हेल्थ एण्ड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता फोरम द्वारा सख्त झटका दिया गया। इस मामले में बीमा कंपनी को क्लेम का आधा-अधूरा भुगतान करने के कारण दोषी पाया गया, और उसे भारी जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।
यह मामला रायगढ़ जिले के खरसिया निवासी अंकित कुमार बंसल से जुड़ा है। अंकित ने 24 सितंबर 2020 को स्टार हेल्थ एण्ड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से चिकित्सा बीमा पॉलिसी ली थी, जिसकी वैधता 24 सितंबर 2022 तक थी। हालांकि, 11 मई 2021 को वह कोविड-19 से संक्रमित हो गए और उन्हें राउरकेला स्थित जय प्रकाश हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उनके इलाज में कुल 3 लाख 38 हजार 509 रुपये का खर्च आया, जिसमें से 50 हजार रुपये और 1 लाख 18 हजार 272 रुपये उन्होंने अस्पताल में जमा किए।
बीमा कंपनी से चिकित्सा क्षतिपूर्ति की उम्मीद थी, लेकिन जब अंकित ने क्लेम दाखिल किया, तो बीमा कंपनी ने केवल 1,70,236 रुपये का भुगतान किया, जबकि शेष 1,68,272 रुपये का भुगतान करने से मना कर दिया। यह बीमा कंपनी की ओर से की गई गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी को दर्शाता है। इसके बाद, अंकित ने अपनी ओर से 4 मार्च 2022 को बीमा कंपनी को विधिक नोटिस भेजा, लेकिन कंपनी ने न तो जवाब दिया और न ही क्लेम राशि का भुगतान किया। इस पर अंकित ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले की सुनवाई के दौरान जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को दोषी ठहराया और कहा कि कंपनी ने बिना किसी ठोस आधार के क्लेम राशि में कटौती की। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित समय में जवाब न देना और क्लेम का आधा भुगतान करना सेवा में कमी को दर्शाता है। इस प्रकार, बीमा कंपनी की यह लापरवाही उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है।
आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिनों के भीतर अंकित कुमार बंसल को बकाया राशि 1 लाख 68 हजार 272 रुपये का भुगतान करे। अगर निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो उस राशि पर वार्षिक छह प्रतिशत ब्याज भी लागू होगा। इसके साथ ही बीमा कंपनी को मानसिक क्षति के रूप में 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये का भुगतान भी करना होगा। कुल मिलाकर बीमा कंपनी को 1 लाख 83 हजार 272 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
यह मामला यह साबित करता है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक प्रक्रिया कितनी प्रभावी हो सकती है। बीमा कंपनियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से करना चाहिए, और उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के लिए लड़े बिना नहीं बैठना चाहिए।

