नये साल में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि: ग्रीन जीडीपी के लिए बना देश का पहला राज्य
रायपुर, 31 दिसंबर 2024: नये साल 2025 की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को “ग्रीन जीडीपी” (Green GDP) के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। इस पहल का उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं के महत्व को समझते हुए राज्य के आर्थिक विकास को एक नया दिशा देना है।
ग्रीन जीडीपी का महत्व:
ग्रीन जीडीपी एक नई अवधारणा है, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र के सेवाओं जैसे जलवायु संतुलन, जैव विविधता संरक्षण, जल पुनर्भरण, वनों से कार्बन अवशोषण और मृदा उर्वरता में सुधार जैसे अमूर्त लाभों को आर्थिक गणनाओं में शामिल किया जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से राज्य की समग्र विकास प्रक्रिया को और अधिक सतत और दीर्घकालिक रूप से प्रभावी बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री और वन मंत्री की प्रतिक्रिया:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग द्वारा संचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा शामिल है। इस दृष्टिकोण से राज्य के पर्यावरणीय और आर्थिक उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध और स्थायी भविष्य सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल राज्य के बजटीय प्रबंधन को सुव्यवस्थित करेगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा देने में भी मदद करेगा। इसके माध्यम से धन आवंटन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, जो वन और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह कदम राज्य के सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
संयुक्त वन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण:
छत्तीसगढ़ में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया है। राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान जैसे गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती ने प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं पैदा की हैं। स्थानीय निवासी जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है, जो छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार है। ये वन लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों का जलवायु संतुलन बनाए रखने, कृषि के लिए परागण, मृदा उर्वरता में सुधार, और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा, वनों का जल पुनर्भरण, शुद्ध ऑक्सीजन का उत्पादन, और प्राकृतिक दृश्यों के माध्यम से मनोरंजन और भावनात्मक संतुष्टि भी मिलती है।
आर्थिक प्रभाव और समग्र विकास:
इस पहल के माध्यम से राज्य के वन संसाधनों के सही मूल्यांकन से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि यह राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। वनों से प्राप्त लाभ स्थानीय उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करेंगे, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को एक नया बल मिलेगा। साथ ही, यह कदम छत्तीसगढ़ को देश में पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
छत्तीसगढ़ का ग्रीन जीडीपी की दिशा में यह कदम न केवल राज्य के लिए, बल्कि समग्र राष्ट्र के लिए एक नई दिशा दिखाता है। यह पहल यह साबित करती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ-साथ बढ़ाया जा सकता है, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में एक अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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