कोरबा जिले के ग्राम पंचायत मलगांव और अमगांव के ग्रामीणों ने एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) द्वारा किए गए पंचायत विलोपन के आदेश को रद्द करने की मांग उठाई है। इन गांवों की जमीन को कोयला खनन के लिए अधिग्रहित किया गया है, जिसके कारण प्रशासन ने पंचायत को विलोपित कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से उन्हें पुनर्वास का उचित लाभ नहीं मिला और वे अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि विस्थापन के लिए ग्रामीणों को डराया-धमकाया जा रहा है और उन्हें मुआवजा और बसाहट जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके अलावा, एसईसीएल प्रशासन पर आंदोलनकारियों के खिलाफ षड्यंत्र रचने और विरोध को दबाने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पिछले 30 वर्षों से रोजगार की उम्मीद थी, लेकिन वे अभी तक बेरोजगार हैं।
इसी बीच, ग्रामीणों ने कोरबा में एक रैली निकाली और कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। वे पंचायत विलोपित करने के फैसले के खिलाफ थे और कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। कलेक्टर अजीत वसंत ने शांतिपूर्ण संवाद किया और ज्ञापन प्राप्त किया। ज्ञापन में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे आगामी पंचायत चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं कि उन्हें बसाहट, रोजगार, मुआवजा और अन्य मूलभूत सुविधाएं दी जाएं और इसके बाद ही उनका गांव खाली किया जाए। साथ ही, उनका कहना है कि 2025 में पंचायत चुनाव कराए जाएं और पंचायत को विलोपित करने के आदेश को तत्काल रद्द किया जाए।
यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती है, बल्कि एसईसीएल और राज्य सरकार के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है, जिसमें विस्थापितों के अधिकार और पुनर्वास नीति की नीतियों का पालन किए जाने की आवश्यकता है।

