छात्रा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहती थी, और 7 दिसंबर से उसके परिवार के सदस्य और रिश्तेदार उससे संपर्क करने में असमर्थ रहे थे। इसके बाद उसके पिता राजनांदगांव से रायपुर पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इस दौरान रविवि हॉस्टल प्रबंधन और विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही के आरोप भी लगाए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की और महिला पुलिसकर्मियों के साथ वृंदावन भेजी एक टीम ने छात्रा को वहां परिक्रमा करते हुए पाया। छात्रा ने पुलिस को बताया कि वह बांके बिहारी के प्रेम में न सिर्फ रायपुर छोड़ कर वृंदावन आई, बल्कि वहां पर रहकर धार्मिक गतिविधियों में भी भाग ले रही थी।
राया थाना प्रभारी अजय कौशल ने जानकारी दी कि छात्रा को वृंदावन में श्याम चौधरी नाम के व्यक्ति ने देखा, जो गांव नगला जंगली का निवासी था। श्याम चौधरी ने छात्रा को परिक्रमा करते हुए देखा और बाद में पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने छात्रा को थाने ले जाकर पूछताछ की और फिर रायपुर पुलिस से संपर्क किया। छात्रा के परिजनों को सूचित करने के बाद पुलिस ने उन्हें मथुरा बुलाया और उनसे बातचीत कराई।
छात्रा के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी इस प्रकार का कदम उठाएगी। उन्होंने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से अपनी शिकायत दर्ज कराई और कड़ी कार्रवाई की मांग की। अब, पुलिस टीम रायपुर लौटने की तैयारी कर रही है, और शुक्रवार रात या शनिवार सुबह तक वह यहां पहुंचने की उम्मीद है।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि बच्चों की मानसिक स्थिति और उनके फैसलों पर परिवार और शिक्षा संस्थानों को किस तरह से ध्यान देना चाहिए।