वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना किसी जरूरी कारण के जंगल में न जाएं। यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक रूप से जंगल में घूमते पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम बाघ और इंसान दोनों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
खैरागढ़ और डोंगरगढ़ के जंगल जैव विविधता से भरपूर हैं और 1990 तक यहां कई बाघों का निवास था। स्थानीय समुदाय को संरक्षण प्रयासों में शामिल करके इस क्षेत्र को एक आदर्श वन्यजीव आवास क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है और इको-टूरिज़्म को बढ़ावा दिया जा सकता है।
खैरागढ़ के डीएफओ आलोक तिवारी ने ग्रामीणों के लिए जरूरी हिदायत जारी की है, जिसमें रात के समय बाहर न निकलने, अकेले या सुनसान इलाकों में न जाने और बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने पर वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है। उन्होंने अफवाह फैलाने से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की भी अपील की है।