रायपुर, 3 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ के गुरु घासीदास नेशनल पार्क में बायसन की एक मादा की मौत एक गंभीर घटना बन गई है। बार नवापारा से शिफ्ट किए गए दो बायसनों में से एक बायसन की मौत होश में लाने के लिए दी गई एक्सपायरी दवा से हुई है, इस बात की पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने की है। इस घटना के बाद संबंधित डॉक्टर को शोकाज नोटिस जारी किया गया है और जंगल सफारी के वेटनरी मेडिकल स्टॉक को सील कर दिया गया है।
दवा की एक्सपायरी और डॉक्टर की गलती
माना जा रहा है कि बायसन को बेहोश करने के लिए जो दवा दी गई थी, वह “कैप्टिवान” नामक दवा थी, जो अत्यधिक ताकतवर है। इसके बाद बायसन को होश में लाने के लिए “एक्टिवान” नामक दवा दी गई, जो 10 माह पहले एक्सपायरी हो चुकी थी। दस्तावेजों के अनुसार, ये दवाइयां दक्षिण अफ्रीका से मंगवाई गई थीं।
बायसन की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टर ने बिना जांच के ही बायसन को इन दवाओं की डोज दी, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मौत हो गई। वन अफसरों ने कहा कि डॉक्टर से विभागीय अधिकार छीन लिए गए हैं और उन्हें वेटनरी दस्तावेज जंगल सफारी के डायरेक्टर को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
दवाओं की लापरवाही और शिफ्टिंग योजना पर असर
बायसन की मौत के बाद, बार नवापारा से और पांच बायसनों को शिफ्ट करने की योजना पर भी असर पड़ा है। कुछ वन अधिकारियों ने बायसन शिफ्टिंग के विरोध में आवाज उठाई है, क्योंकि अगर यह शिफ्टिंग जारी रहती, तो अन्य बायसनों की भी जान जा सकती थी।
वन्यजीव प्रेमियों की आपत्ति
वन्यजीव प्रेमियों ने एक्सपायरी दवा का इस्तेमाल करने पर कड़ी आपत्ति जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। नितिन सिंघवी, एक वन्यजीव प्रेमी ने कहा कि एक्सपायरी दवा के इस्तेमाल के बारे में पूरी जांच होनी चाहिए और इसे पहले बलौदाबाजार भेजा गया था, उस वक्त इसकी जांच क्यों नहीं की गई?
अगले कदम
वन विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और जल्द ही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बायसन के संरक्षण और उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

