दमोह, 8 अप्रैल 2025: मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक फर्जी डॉक्टर की करतूत ने स्वास्थ्य प्रणाली को हिलाकर रख दिया है। यह मामला तब उजागर हुआ जब पता चला कि नरेंद्र विक्रमादित्य यादव नामक व्यक्ति ने ब्रिटिश डॉक्टर एन. जॉन कैम की पहचान चुरा ली और दो महीने में करीब 15 सर्जरी कीं, जिनमें से सात मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फर्जी पहचान चोरी और सर्जरी का सिलसिला
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब दमोह के मिशन हॉस्पिटल में डॉक्टर एन. जॉन कैम के नाम से एक कार्डियोलॉजिस्ट को नियुक्त किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यादव ने नकली दस्तावेजों के जरिए दिसंबर 2024 में इस अस्पताल में नौकरी शुरू की और 8 लाख रुपये प्रति माह वेतन पर काम किया। यहाँ मरीजों का इलाज करते समय उसने न केवल एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी कीं, बल्कि उन उपचारों के लिए सरकारी आयुष्मान भारत स्कीम के फंड का भी दुरुपयोग किया।
मरीजों की जान को खतरे में डालने वाले ऑपरेशन
फर्जी डॉक्टर के जाल में फंसने वाले मरीजों में से एक रहीसा बेगम की कहानी बेहद दर्दनाक है। 63 वर्षीय रहीसा को दिल की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें सर्जरी का सुझाव दिया गया। सर्जरी के बाद उनकी मौत हो गई, और फर्जी डॉक्टर ने कहा कि यह हार्ट अटैक का मामला था। इसी प्रकार, मंगल सिंह नामक एक अन्य मरीज की भी सर्जरी के दौरान मौत हो गई और उन मरीजों की परिजनों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन से पहले और बाद में डॉक्टर से कोई संपर्क नहीं हुआ।
कैसे खुला फर्जी डॉक्टर का राज?
फर्जी डॉक्टर का पर्दाफाश तब हुआ जब कृष्णा पटेल ने अपने दादाजी का इलाज कराने के लिए मिशन अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। अस्पताल में भर्ती के दौरान उन्हें एंजियोग्राफी के लिए 50 हजार रुपये की मांग की गई, जो सामान्य दरों से कहीं अधिक थी। बाद में, जब कृष्णा ने अनियमितताओं की जाँच की, तो उन्होंने कुछ कागजात इकट्ठा किए और मामले की शिकायत की। इसके चलते प्रशासन ने जांच शुरू की, लेकिन डॉक्टर ने फरार हो गया।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
प्रारंभिक जांच के बाद, पुलिस ने यादव की तलाश शुरू की, और उसे प्रयागराज में पकड़ लिया गया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने उसके विभिन्न संपर्कों का अध्ययन किया, जिससे उसकी लोकेशन का पता चला। अंततः, उसे उसके ठिकाने पर गिरफ्तार कर लिया गया और दमोह लाया गया।
नैतिक और मानवाधिकार आयोग की जांच
इस मामले में नैतिक मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी जांच शुरू कर दी है। आयोग की टीम ने स्थानीय प्रशासन से बातचीत की और पीड़ित परिवारों से मिले। आयोग की रिपोर्ट और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
यह मामला बिना किसी संदेह के स्वास्थ्य प्रणाली में गहरी अनियमितता की ओर इशारा करता है और यह स्पष्ट करता है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त उपायों की आवश्यकता है। अब यह देखना है कि प्रशासन इस मामले में तत्काल क्या कदम उठाता है ताकि भविष्य में ऐसी विकृतियों से बचा जा सके।

