नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टेस्ला तथा स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क के बीच फोन पर हुई बातचीत ने एक बार फिर भारत-अमेरिका के प्रौद्योगिकी संबंधों में संभावित सहयोग की उम्मीदें जगा दी हैं। प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण संवाद की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में बताया कि बातचीत के दौरान वर्ष की शुरुआत में वाशिंगटन डीसी में हुई उनकी मुलाकात और उस समय उठाए गए मुद्दों को लेकर भी चर्चा की गई। उन्होंने लिखा, “हमने प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर चर्चा की। भारत अमेरिका के साथ इन क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब भारत नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में वैश्विक भागीदारी को लेकर प्रयासरत है। एलन मस्क की कंपनियाँ – खासकर टेस्ला और स्पेसएक्स – इन सभी क्षेत्रों में अग्रणी मानी जाती हैं। भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने की नीतियाँ, मस्क के लिए भारतीय बाजार में निवेश के नए अवसर खोलती हैं।
भारत-अमेरिका साझेदारी के नए आयाम
प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम मानी जा रही है। अमेरिका के साथ तकनीकी भागीदारी को लेकर भारत लंबे समय से प्रयासरत है, और एलन मस्क जैसी प्रभावशाली हस्तियों के साथ संवाद, इस दिशा में बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि टेस्ला भारत में उत्पादन शुरू करती है तो इससे देश में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति को नई गति मिलेगी और साथ ही लाखों रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
पीएम मोदी का सांस्कृतिक पहलुओं पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को गुरु तेग बहादुर जी के पावन प्रकाश पर्व पर भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस और करुणामय सेवा का प्रतीक है। अन्याय के खिलाफ उनकी अडिगता प्रेरणादायक है। उनकी शिक्षाएं हमें उनके देखे गए आदर्श समाज के निर्माण में मार्गदर्शन करती रहेंगी।”
प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि यह भारतीय मूल्यों और विरासत को भी उजागर करता है, जो विश्व मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देता है।
गीता और नाट्यशास्त्र को मिली वैश्विक मान्यता
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में यह जानकारी भी दी कि यूनेस्को ने गीता और नाट्यशास्त्र को अपने ‘Memory of the World’ रजिस्टर में शामिल किया है। यह रजिस्टर उन सांस्कृतिक दस्तावेज़ों और ग्रंथों की सूची है जिन्हें विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी जाती है।
पीएम मोदी ने इसे “हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण” बताते हुए कहा, “यह हमारी शाश्वत बुद्धिमत्ता और समृद्ध संस्कृति को मिली वैश्विक मान्यता है। गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से सभ्यता और चेतना का पोषण किया है। उनकी अंतर्दृष्टि आज भी विश्व को प्रेरित करती है।”

