रायगढ़। जिले के घरघोड़ा ब्लॉक अंतर्गत टेंडा नवापारा सोसाइटी में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में 2 करोड़ 27 लाख 65 हजार 260 रुपए के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में सहकारी समिति प्रबंधक, कम्प्यूटर ऑपरेटर और चपरासी को दोषी ठहराते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर अपेक्स बैंक शाखा तमनार के प्रबंधक विमल कुमार सिंह द्वारा घरघोड़ा थाना में दर्ज कराई गई।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब 18 अक्टूबर 2024 को धान उपार्जन के बाद स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में पाया गया कि 7,159.60 क्विंटल धान, जिसकी बाजार कीमत 2 करोड़ 21 लाख 94 हजार 760 रुपए आँकी गई है, वह खरीदी के बाद गायब था। इसके साथ ही धान खरीदी हेतु भेजे गए बारदाने (बोरों) में भी भारी गड़बड़ी सामने आई। 4,108 नग नया बारदाना, 426 नग मिलर्स बारदाना, और 1,854 नग पीडीएस बारदाना का कोई अता-पता नहीं था। बारदाने में हुई इस गड़बड़ी की कीमत 5 लाख 70 हजार 500 रुपए आँकी गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 2.27 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति सरकार को हुई है। इस गबन के लिए मनोज कुमार गुप्ता (प्रबंधक एवं बारदाना प्रभारी), मुकेश यादव (कम्प्यूटर ऑपरेटर) और दिलीप राठिया (भृत्य) को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है।
इस घोटाले की जाँच सहकारिता विस्तार अधिकारी और खाद्य निरीक्षक घरघोड़ा द्वारा की गई थी, जिनकी रिपोर्ट अपेक्स बैंक प्रबंधक को सौंपी गई। इसके बाद रायगढ़ कलेक्टर कार्तिकेया गोयल को भी इसकी जानकारी दी गई। कलेक्टर ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। पहले अपेक्स बैंक के अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर फाइल लौटा दी थी, लेकिन कलेक्टर की सख्ती और समय सीमा बैठक में फटकार के बाद आखिरकार गुरुवार को एफआईआर दर्ज की गई।
घरघोड़ा पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा बीएनएस 3(5), 316(5), 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। यह मामला जिले की अब तक की सबसे बड़ी सहकारी धान खरीदी गड़बड़ी में से एक माना जा रहा है।
इस प्रकरण ने न सिर्फ सरकारी अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सहकारी समितियों में चल रही अंदरूनी गड़बड़ियों और प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है और जल्द ही उन्हें हिरासत में लेने की उम्मीद जताई है।

