जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासी और स्टील कारोबारी दिनेश मिरानिया की आतंकियों द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई। वे अपने परिवार के साथ अपनी शादी की सालगिरह मनाने के लिए बैसारन घाटी गए थे, जब आतंकियों ने उनका नाम पूछकर पत्नी और बच्चों के सामने उन्हें गोली मार दी। इस हमले में उनकी पत्नी नेहा घायल हुई हैं, जबकि दोनों बच्चे सुरक्षित हैं।
मंगलवार को हुए इस हमले के बाद बुधवार की शाम दिनेश मिरानिया का पार्थिव शरीर रायपुर लाया गया, जहां गुरुवार सुबह समता कॉलोनी स्थित उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम विदाई के इस भावुक क्षण में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, राज्यपाल रमेन डेका, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
मुख्यमंत्री साय ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा, “यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की क्षति है। प्रदेश ने अपना एक बेटा खोया है। इस कठिन समय में सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान करेगी।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि दिनेश मिरानिया की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य सरकार किसी सड़क या चौक को उनके नाम पर नामांकित करेगी।
साय ने आतंकियों की इस कायराना हरकत की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे देश की आत्मा पर हमला है। धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में जो शांति और विकास का वातावरण बना था, उसे अस्थिर करने की साजिश की गई है। पाकिस्तान के इशारे पर हुए इस हमले का देश एकजुट होकर जवाब देगा।”
राज्यपाल और वित्त मंत्री ने भी दी श्रद्धांजलि
राज्यपाल रमेन डेका ने भी मिरानिया के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और परिजनों को गहरी संवेदना व्यक्त की। वहीं, अंतिम संस्कार में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने तीव्र शब्दों में आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा, “सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जहां किसी को अपनी धार्मिक पहचान छुपाकर जान बचाने की जरूरत न पड़े। न किसी को तिलक मिटाना पड़े, न कलावा छुपाना पड़े, न किसी को कलमा पढ़कर अपनी जान बचानी पड़े।”
सवालों के घेरे में कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था
दिनेश मिरानिया की हत्या ने एक बार फिर कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता खड़ी कर दी है। एक शांतिपूर्ण उद्देश्य से घाटी गए नागरिक की पहचान पूछकर हत्या कर देना न केवल अमानवीय है, बल्कि घाटी में आतंकियों की सक्रियता का संकेत भी देता है।
इस हृदयविदारक घटना ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। दिनेश मिरानिया की शहादत को प्रदेश कभी नहीं भूलेगा। उनका बलिदान एक याद दिलाता है कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में हम सबको एकजुट रहना होगा।

