छत्तीसगढ़ में ACB और EOW ने 324 करोड़ रुपये के भारतमाला मुआवजा घोटाले के संबंध में ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ की गई, जिसमें रायपुर, नया रायपुर, दुर्ग-भिलाई, अभनपुर, आरंग और बिलासपुर जैसे जिलों के प्रशासनिक और बैंक अधिकारियों के निवास व कार्यालय शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, इस जांच में वर्तमान और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों जैसे SDM, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी और RI के साथ-साथ बैंक मैनेजर भी शामिल हैं। भिलाई में एक बैंक मैनेजर के आवास पर छापा मारा गया, जहां उसके परिजनों से पूछताछ की गई और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का विवरण लिया गया। वहीं, बिलासपुर में अतिरिक्त तहसीलदार लखेश्वर ध्रुव के घर पर भी ACB की टीम ने दस्तावेजों की जांच की। ध्रुव पहले रायपुर में नायब तहसीलदार थे और अब बिलासपुर में कार्यरत हैं।
रायपुर में, तात्कालिक SDM निर्भय साहू और तहसीलदार शशिकांत कुर्रे के घरों पर भी छापेमारी की गई। EOW की टीम इन अधिकारियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की विस्तृत जांच कर रही है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इस मामले में बयान दिया, जिसमें कहा गया कि भारतमाला परियोजना से संबंधित सरकार को मिली शिकायतों के आधार पर EOW को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह घोटाला पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था, और वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है।
इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, और संभावना है कि आने वाले दिनों में और अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। EOW और ACB की सक्रियता ने यह संकेत दिया है कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी विभागों में एक नई चेतना का संचार हो सकता है।

