छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों और आसपास के 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन कगार’ लगातार आठवें दिन भी जारी है। इस विशाल अभियान में राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कुल 24,000 से अधिक जवान शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य माओवादी संगठनों — जैसे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC), पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA), तेलंगाना राज्य समिति और अन्य से इस क्षेत्र को मुक्त कराना है।
अब तक तीन नक्सली मारे गए हैं, जिनके शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि दो सुरक्षाकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं। पहली घटना 24 अप्रैल की रात को हुई थी, जिसमें एक STF जवान आईईडी विस्फोट में घायल हुआ। दूसरी घटना 26 अप्रैल को हुई, जिसमें DRG का जवान मामूली रूप से घायल हुआ।
यह क्षेत्र नक्सलियों का एक प्रमुख गढ़ रहा है और हाल के हफ्तों में यहां नागरिकों पर हमले की घटनाएं भी हुई हैं। एक महिला की मौत और कई ग्रामीणों के घायल होने के बाद इस ऑपरेशन को और अधिक सघन कर दिया गया।
पुलिस को खुफिया जानकारी मिली है कि हिडमा, दामोदर और देवा जैसे कुख्यात और मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर इसी क्षेत्र में छिपे हुए हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर बीजापुर और कर्रेगुट्टा पहाड़ियों की घेराबंदी की गई है।
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के सुरक्षाबलों के अलावा डीआरजी, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, कोबरा और सीआरपीएफ की विशेष इकाइयाँ इस अभियान में भाग ले रही हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा और संगठित नक्सल विरोधी ऑपरेशन माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह माओवादियों से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। साथ ही, नक्सलियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की भी अपील की जा रही है।
अब तक की कार्रवाई (दिसंबर 2023 से अप्रैल 2025 तक):
- 365 नक्सली मारे गए
- 1382 नक्सली गिरफ्तार
- 2306 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
साल 2025 में अब तक:
- 144 नक्सली मारे गए
- 367 गिरफ्तार
- 476 ने आत्मसमर्पण किया
‘ऑपरेशन कगार’ माओवादियों के गढ़ को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

