बिलासपुर, 28 अप्रैल 2025 – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने मानवता से जुड़ा एक अहम निर्णय सुनाते हुए कैंसर पीड़ित महिला को एंबुलेंस सुविधा न मिलने के मामले में रेलवे और राज्य सरकार को संयुक्त रूप से तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले ने सरकारी सिस्टम की लापरवाहियों पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
यह मामला 18 मार्च 2025 का है, जब मध्यप्रदेश के बुढ़ार निवासी 62 वर्षीय महिला, जो कैंसर से पीड़ित थी, रायपुर से ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के जनरल कोच में सफर करते हुए बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। महिला को बिलासपुर से ट्रेन बदल कर बुढ़ार जाना था, लेकिन रास्ते में उसकी तबीयत और बिगड़ गई।
ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही परिजनों ने रेलवे कर्मचारियों से मदद मांगी। इसके बाद रेलवे की ओर से केवल एक स्ट्रेचर भेजा गया, जिससे कुलियों ने महिला को गेट तक पहुंचाया और वहीं छोड़ दिया। करीब एक घंटे की देरी से एंबुलेंस पहुंची, लेकिन तब तक महिला की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। मौत हो जाने के कारण एंबुलेंस ने महिला को अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया। अंततः परिजनों ने दूसरे वाहन का इंतज़ाम कर शव को अपने गांव पहुंचाया।
कोर्ट की प्रतिक्रिया
इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन और रेलवे दोनों की ओर से दाखिल जवाबों को अपर्याप्त और असंवेदनशील करार दिया। कोर्ट ने कहा कि जब सरकारें मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं और योजनाओं की घोषणा करती हैं, तो जमीनी स्तर पर सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं?
रेलवे की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि रेलवे ने समय पर स्टाफ भेजा था, पर गाड़ी में कोई नहीं मिला। वहीं राज्य सरकार की ओर से सामान्य जानकारी दी गई, जो कोर्ट के अनुसार पर्याप्त नहीं थी।
कोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा:
- रेलवे को 1 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
- राज्य शासन को 2 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देनी होगी।
- इसके अलावा, भविष्य में ऐसे मामलों में एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के लिए ठोस योजना बनाने के निर्देश भी दिए गए।
इस आदेश के साथ ही कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
दूसरा मामला: दंतेवाड़ा की घटना
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक और मामला सामने रखा, जिसमें दंतेवाड़ा जिले के गीदम में 11 घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण एक मरीज की मौत हो गई थी। परिजन बार-बार 108 पर कॉल करते रहे लेकिन एंबुलेंस सुबह के बजाय रात में पहुंची। इस मामले में अभी सुनवाई जारी है।

