छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते दिनों आए तेज आंधी-तूफान ने शहरवासियों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। शुक्रवार शाम लगभग चार बजे के बाद अचानक तेज हवा और धूलभरी आंधी चलने लगी, जिसकी रफ्तार लगभग 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा रही। इस प्राकृतिक आपदा ने शहर के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। पेड़ गिरने, होर्डिंग्स के ढहने और टीन शेड उड़ने जैसी घटनाओं से जनजीवन पूरी तरह बाधित हो गया।
इस तूफान का सबसे ज्यादा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा। रायपुर के कई इलाकों में दोपहर बाद से ही बिजली आपूर्ति ठप हो गई। शाम चार बजे के बाद तो कई क्षेत्रों में बिजली पूरी तरह गुल हो गई। महादेवघाट, चंगोराभाठा, सत्यम विहार, शिवम विहार, सुंदरम विहार और मानसरोवर कॉलोनी जैसे इलाकों में लोग पूरी रात अंधेरे में रहे। बिजली के अभाव में लोग गर्मी से बेहाल होते रहे। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से परेशान नजर आए।
लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया बिजली विभाग की उदासीनता ने। कई उपभोक्ताओं ने जब बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद मिले। ‘मोर बिजली 2.1’ ऐप पर भी केवल यही संदेश दिख रहा था कि आंधी-तूफान के कारण पेड़ों के बिजली लाइनों पर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई है और मरम्मत का कार्य जारी है। मगर लोगों के अनुसार, विभागीय कर्मचारियों की उपस्थिति फील्ड में बहुत सीमित रही। कुछ फीडर केंद्रों पर कर्मचारी ही नदारद थे, जिससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई नागरिकों ने चंगोराभाठा स्थित बिजली उपकेंद्र पर जाकर विरोध जताया। जब महापौर मीनल चौबे से इस बाबत संपर्क किया गया तो उन्होंने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
तूफान की वजह से केवल बिजली ही नहीं, शहर की सड़कों और आवागमन पर भी असर पड़ा। कई जगहों पर पेड़ और होर्डिंग्स गिर जाने से रास्ते बंद हो गए। देवेंद्र नगर में तो पैदल राहगीरों के लिए बनाया गया एक बड़ा टीन शेड गिर गया, जिसकी चपेट में कई कारें आ गईं। राहत कार्य में जेसीबी मशीन की मदद लेनी पड़ी।
मौसम विभाग ने आने वाले पांच दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य में मेघगर्जन, तेज हवाएं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। कहीं-कहीं पर ओलावृष्टि की भी आशंका है, हालांकि तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है।
इस आपदा ने एक बार फिर शहर की आपदा प्रबंधन प्रणाली की पोल खोल दी है। जहां एक तरफ जनता गर्मी और बिजली कटौती से परेशान रही, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभागों की सुस्ती और लापरवाही से लोगों का भरोसा डगमगाया है।

