भाजपा कार्यालय की भूमि पूजन पर कांग्रेस का मौन, पत्थलगांव में उठे सवाल
जिस जमीन को लेकर कभी कांग्रेस ने किया था जोरदार विरोध, अब उसी मुद्दे पर खामोशी क्यों?—जनता पूछ रही सवाल
पत्थलगांव। भाजपा कार्यालय के भूमि पूजन को लेकर कुछ समय पहले पत्थलगांव की राजनीति में मचा घमासान अब एक नए सवाल में बदलता दिखाई दे रहा है। जिस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पत्थलगांव आगमन के दौरान जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और भाजपा कार्यालय की प्रस्तावित जमीन को आदिम जाति मर्यादित सेवा समिति एवं किसान हित से जुड़ी जमीन बताते हुए सवाल उठाए थे, उसी भूमि पर भूमि पूजन हो जाने के बाद कांग्रेस की चुप्पी को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
कांग्रेस नेताओं ने उस समय आरोप लगाया था कि भाजपा कार्यालय के लिए ऐसी जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर आदिम जाति मर्यादित सेवा समिति तथा किसानों का हित जुड़ा हुआ है। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस महामंत्री श्रीमती आरती सिंह के नेतृत्व में ब्लॉक कांग्रेस के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे थे। पुलिस द्वारा कुछ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई थी।
मामले ने इसलिए भी राजनीतिक तूल पकड़ा था क्योंकि पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय पूर्व में विधानसभा में आदिवासी जमीनों के अवैध क्रय-विक्रय और कब्जे से जुड़े धारा 170-ख के मामलों को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को आधार बनाकर भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला बोला था।
लेकिन अब भूमि पूजन हो चुका है। ऐसे में आम नागरिकों के बीच सवाल उठ रहा है कि जिस जमीन को लेकर कांग्रेस ने इतने जोर-शोर से आवाज उठाई थी, उस मामले में आगे क्या हुआ? क्या जमीन के स्वामित्व और उपयोग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई जांच हुई? क्या कांग्रेस ने अपने पुराने आरोपों को लेकर कोई दस्तावेज सार्वजनिक किए?
किसान और आदिवासी हित की राजनीति का दावा करने वाले दोनों प्रमुख दलों के बीच यह मुद्दा अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। जनता जानना चाहती है कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व क्या है और भाजपा कार्यालय के लिए भूमि का आवंटन अथवा उपयोग किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
पत्थलगांव पूछ रहा है—विरोध से भूमि पूजन तक आखिर ऐसा क्या बदला कि कांग्रेस की आवाज अब खामोश हो गई?




