कोरबा. अश्विन माह की शरद ऋतु में आने वाली पूर्णिमा 30 अक्टूबर को है। इस दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। बताते हैं इस दिन अमृत वर्षा होती है इसलिए लोग खुले आसमान के नीचे खीर रखकर अगले दिन प्रसाद बांटते हैं। यह रस्म शुक्रवार को निभाई जाएगी। यह शरद पूर्णिमा इसलिए भी खास है क्योंकि यह 5 शुभ संयोग लिए हुए है। माता लक्ष्मी की पूजा का विधान इस है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा पर ही देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए इसे लक्ष्मीजी का प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस खुले आसमान के नीचे खीर रखने पर वह अमृत हो जाती है। शरद पूर्णिमा पर अमृत वर्षा होने से इस का प्रसाद ग्रहण करना सौभाग्य की बात होती है। प्रसाद ग्रहण करने वालों के जीवन में कई तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही जो लोग माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं उनके यहां वर्ष भर धन व वैभव की कोई कमी नहीं होती है। बंगाली समुदाय में लक्खी पूजा के दिन दुर्गा पूजा वाले स्थान पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से प्रतिमा स्थापित कर के पूजा अर्चना की भी परंपरा है।
श्वास व दमा की औषधि का रहता है महत्व
शरद पूर्णिमा पर श्वास व दमा के रोगियों के लिए इस दिन औषधि दी जाती है। इस दवा का सेवन शरद पूर्णिमा की रात खीर में मिलाकर करते हैं। यह पतंजलि चिकित्सालय के डॉ.नागेन्द्र शर्मा द्वारा हर साल वितरित की जाती है।
खरीदारी का है शुभ मुहूर्त प्रापर्टी खरीदने विशेष दिन
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग होने से इलेक्ट्रानिक सामान, ज्वेलरी, फर्नीचर, व्हीकल व सुख सुविधा के सामान की खरीदारी करना लाभदायी है। प्रापर्टी खरीदी के लिए विशेष शुभ मुहूर्त है इस दिन।
चंद्रमा की सोलह कलाओं का होता है दर्शन
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का दर्शन सोलह कलाओं के रूम में होता है। जो प्रकाश के रूप में होती हैं। मनुष्य के मन में भी एक प्रकाश है। मन ही चंद्रमा है। चंद्रमा जैसे घटता बढ़ता रहता है। मन की स्थिति भी यही होती है।

