बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस को बच्चे की जेब से एक कागज मिला है। इसमें गले में फंदा डालते हुए एक स्केच है और लिखा है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मृत्यु है। यह घटना इसलिए और चिंता पैदा करने वाली है क्योंकि बच्चे के परिजनों के मुताबिक उसे न तो कोई परेशानी थी और न अवसाद के कोई लक्षण थे। इस बारे में मनोचिकित्सकों का कहना है कि कई बार अवसाद के लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं। आत्महत्या की प्रवृत्ति एक दिन में नहीं पनपती है इसलिए बच्चे क्या कर रहे हैं, इस पर हमेशा नजर रखें।
परिजन बोले- उसे कोई परेशानी या चिंता नहीं थी
बिलासपुर में सीपत के उच्च भट्ठी निवासी सुखदेव कुमार मोहित (18) 12वीं का छात्र था। गुरुवार को वह बड़ी मां के साथ था। उसकी मां और छोटा भाई रिश्तेदार के घर गए थे। रात को बड़ी मां ने खाना खाने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। कहा- अभी भूख नहीं है, वह खुद खाना निकालकर खा लेगा। इसके बाद बड़ी मां सो गई।
छात्र अपने कमरे में ही था। सुबह बड़ी मां उठकर साफ सफाई करने उसके कमरे में गई तो सुखदेव फंदे से लटक रहा था। उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना है कि सुखदेव को कोई परेशानी नहीं थी। कभी उसने चिंता या परेशानी वाली कोई बात भी नहीं बताई।
पेटिंग का शौक था, खुदकुशी से पहले फंदे का बनाया चित्र
सुखदेव को पेंटिग का शौक था। वह अक्सर कॉपी लेकर स्केच बनाया करता था। पुलिस ने सुखदेव के कपड़ों की तलाशी ली तो जेब से एक चिट्ठी मिली। इसमें पेन से फंदे गले में डालते हुए एक चित्र बनाया है। लिखा-मैं अपनी मौत के लिए स्वयं जिम्मेदार हूं। मुझे माफ कर देना। सॉरी… सॉरी।
अवसाद के लक्षण
नींद न आना, नींद बार-बार टूटना, भूख न लगना, अपने दोस्तों या परिजनों से कम बात करना, उदास रहना, ऐसे काम जिनमें आपको पहले ख़ुशी मिलती थी। उन कामों में खुशी न मिलना। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत ही किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लें।
बच्चे अभी तनाव में क्यों हैं
लॉकडाउन और उसके बाद के महीनों के प्रभाव के बारे में डॉक्टर संदीप तिवारी बताते हैं कि, छात्रों में भविष्य की अनिश्चिता को लेकर तनाव था। खास तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे तो ज्यादा अवसाद में आ रहे हैं। यहां तक कि मजदूरों के मामले भी आते, जो काम ढूंढते हैं, व्यापारी यह कहकर हाथ जोड़ लेते कि उनका ख़ुद का काम ठप है, वह किसी और को रोजगार क्या देंगे? घरेलू विवादों और हिंसा के मामले भी बढ़ रहे हैं।

