रायगढ़. सभी थानों में मौजूद होने वाले रोजनामचे को पूरी तरह से ऑनलाइन किया जा रहा है। अभी तक रोजनामचे को हाथ से डायरी में नोट किया जाता था। आईजी के निर्देश के बाद रायगढ़ के सभी थानों में रोजनामचे को ऑनलाइन दर्ज करना शुरू कर दिया गया है। थानों में हर रोज होने वाली एक्टिविटी को दर्ज करने वाली डायरी रोजनामचे को ऑनलाइन कर दिया गया है। एफआईआर के अलावा किसी संदिग्ध को लाने पर, थाने में विवाद होने या फिर किसी अफसर के दौरे जैसी सभी बातें रोजनामचे में दर्ज होती है। पुलिस रोजनामचे में दर्ज शिकायत से आरोपी का नाम हटाने के लिए कई बार पन्ने ही गायब किए जाने की शिकायत लगातार मिलती रही है। इसी तरह अपने मुताबिक नाम डालने और हटाने की शिकायत भी ऑफलाइन में रहती थी। ऐसे में अब ऑनलाइन रोजनामचा दर्ज होने पर इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। अफसरों के अनुसार रायगढ़ में दर्ज रोजनामचे को छत्तीसगढ़ के कोई भी अफसर देख सकेंगे। सभी थाने एक सर्वर से जुड़े हुए है। इसमें एसपी, आईजी, डीजीपी सभी के सिस्टम कनेक्ट है। अब रोजनामचे से छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। आदेश के बाद रायगढ़ के सभी थानों में मौजूद ऑपरेटर को रोजनमाचा ऑनलाइन ही दर्ज करने निर्देशित किया गया है।
जवानों को दी जाएगी कम्प्यूटर की ट्रेनिंग
पुलिस पूरी तरह से ऑनलाइन होने का प्रयास तो कर रही है लेकिन जिले में कई ऐसे पुलिस जवान है, जिन्हें कंप्यूटर के बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे में अचानक आने वाले आदेश से थाने में मौजूद ऑपरेटरों पर बोझ बढ़ रहा है। पुलिस के अफसर जरूरत के अनुसार पुलिस जवानों को ट्रेनिंग देने की बात कह रहे हैं। ताकि जवान कंप्यूटर में अपना सारा काम निपटा पाए और थाना पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाए।
यह होता है रोजनामचा
कानून के जानकारों के अनुसार रोजनामचा दो शब्दों से बना है। पहला शब्द रोज है और दूसरे शब्द नामचा का मतलब दर्ज करने से है। यानि रोज की गतिविधियों को दर्ज करना। थाने में लिखी जाने वाली एफआईआर से लेकर, कौन जवान कब कहां जा रहा है। थाने में क्या एक्टिविटी की जा रही है। थाने में कौन आया कौन गया। थाने के बारे में पूरा लेखा-जोखा रोजनामचे में होता है। यह एक तरह से थाने की पर्सनल डायरी होती है।
ये कमी जिससे कमजोर हो सकता है अभियान
इससे पहले एफआईआर को सीसीटीएनएस में ऑनलाइन ही दर्ज करने निर्देशित किया गया था। सालों से पन्नों पर दर्ज हो रहे एफआईआर को अचानक से ऑनलाइन करने में पुलिस को लगभग दो साल से ज्यादा का समय लग गया। अभी भी सर्वर हैंग होने या फिर कोई तकनीकी दिक्कत होने पर ऑफलाइन ही अपराध दर्ज किया जाता है। पुलिस हाथों-हाथ एफआईआर दर्ज करने की बात जरूर कहती है। कई मामलो में लोगों को आज भी घुमाया जाता है।
जल्द ही थाने होंगे ऑनलाइन
“रोजनामचे को ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश है। हमने कई थानों में इसकी शुरुआत भी कर दी है। जल्द ही हम पूरी तरह से ऑनलाइन हो जाएंगे।”
-अभिषेक वर्मा, एएसपी, रायगढ़ साभार: दैनिक भास्कर

