जशपुर. कुनकुरी से झारखंड बार्डर शंख नदी पुल तक बन रहे नेशनल हाइवे में सड़क का काम लगभग पूरा हाे चुका है, पर अब भी एक बड़े ब्रिज के साथ कई पुल अब तक नहीं बन पाए हैं। पुलों का निर्माण तेजी से चल रहा है लेकिन डायवर्सन वाली सड़क पर धूल से राहत देने की कोई व्यवस्था नहीं की है। डायवर्सन सड़क पर सड़क भी प्लेन नहीं है और मिट्टी का भराव काफी अधिक हो गया है, जिससे दोपहिया वाहन सवार इसमें गिर रहे हैं। अधूरे पुलों के पास बनी डायवर्सन सड़क पर हर वक्त दुर्घटना का डर बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक धूल से राहत देने के लिए रोजाना पानी का छिड़काव निर्माण एजेंसी करा रही है, पर हकीकत में ऐसा नहीं है। सड़क पर दोपहिया वाहन सवारों को चलने में सबसे ज्यादा दिक्कतें हो रही है। मनसा देवी मंदिर के पास बन रहे पुल, चरईडांड़ और खटंगा के पास बन रहे पुल का निर्माण पूरा नहीं होने से यहां लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही है। खटंगा के पास बने पुल के डायवर्सन में धूल का गुबार उठ रहा है। इन गड्ढों में मिट्टी भरी गई है, जिससे वाहन चालकों को अंदाजा नहीं लग पाता है कि वाहन का पहिया मिट्टी से छिपेे गड्ढे में जा रहा है। कई चारपहिया वाहन फंस रहे हैं और दोपहिया वाहन चालक गिर रहे हैं। लोरो घाटी में सड़क का एक हिस्सा बन चुका है और दूसरे हिस्सा कच्चे रास्ते में तब्दील हो गया है। जिस हिस्से पर सड़क बनी है उसपर आवागमन शुरू नहीं हुआ है।वाहन कच्चे रास्ते से होकर गुजर रहे है। इससे घाटी में धूल का गुबार उठता है। इसके अलावा घाटी में तीनों टर्न पर वर्तमान में स्थिति खतरनाक है, क्योंकि टर्न में भी एक ही हिस्से से गाड़ियां पार हो रही हैं। जशपुर से बाहर निकलने के लिए अभी एनएच ही एकमात्र सड़क है, क्योंकि दमेरा सड़क की रिपेयरिंग का काम बीते दो साल से नहीं हो पाया है। यह सड़क चलने लायक नहीं बची है।
पानी का छिड़काव हो रहा
“अभी तीन पुलों का निर्माण बचा है। निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। डायवर्सन वाली सड़क पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। ताकि धूल की समस्या से लोगों को राहत मिले। सड़क का निर्माण मई महीने तक पूरा होगा।”
-संजय दिवाकर, एसडीओ, नेशनल हाइवे।
साभार: दैनिक भास्कर

