नवाचार करने वाले शिक्षक अब भी पूरा जोर लगा रहे हैं ताकि जारी रहे पढ़ाई लेकिन कुछ गांवों में परेशान हैं स्टूडेंट्स
एड़ू. कोरोना संक्रमण के कारण 8 महीने से स्कूल बंद हैं। जिले में कई शिक्षकों ने लाउडस्पीकर गुरुजी और मोहल्ला क्लास शुरू कर मिसाल पेश की है। कुछ जगहों में ऑनलाइन पढ़ाई में और भी नवाचार हो रहे हैं वहीं कई इलाकों में इंटरनेट या मोबाइल की कमी के कारण विद्यार्थी नियमित ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। घरघोड़ा ब्लाक का हाथी प्रभावित गांव चुहकीमार है, यहां मिडिल और हाई स्कूल के विद्यार्थी 3 किमी दूर बनहर तक पढ़ाई करने जाते हैं। यहां प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई ऑनलाइन कराई जा रही थी, नेटवर्क की दिक्कत के कारण मोहल्ला क्लास शुरू की गई। मीडिल स्कूल के छात्र प्रेम राठिया ने बताया कि यहां 20 से ज्यादा बच्चे चुहकीमार से बनहर में पढ़ाई करते हैं। 12वीं की छात्रा माधुरी निषाद एवं कुमारी निषाद ने बताया कि हम लोगो की ऑनलाइन क्लास तो चल रही परंतु हम लोग पढ़ नहीं पाते प्रश्न उत्तर पीडीएफ में भेजने से कॉपी करते हैं। दो-तीन बच्चे इकट्ठे हो कर छत पर पढ़ते हैं सुबह 8 बजे क्लास शुरू होती है, आधा घंटे में धूप तेज हो जाती है और वहां बैठ नहीं। दो दिन पहले बारिश हुई तो छत पर जा नहीं पाए, घर में सिग्नल नहीं है इसलिए पढ़ाई ही नहीं हो पाई। नवोदय में पढ़ने वाले फलोत्मा राठिया एवं सुनीता राठिया एवं एकलव्य स्कूल के किशन राठिया कहते हैं कि घर में नेटवर्क नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरपंच रामपाल राठिया ने बताया कि यहां नेटवर्क की समस्या तो है इससे आॅनलाइन पढाई प्रभावित हो रहा है साथ ही कई बार कोई बडी मुसीबत आने से फोन में संपर्क करने के लिए नेटवर्क ढूंढना पड़ता है यह गांव हाथी प्रभावित है।
घर के भीतर नेटवर्क नहीं
“प्राथमिक शाला में कुल 34 बच्चे हैं। मोहल्ला क्लास रोज नहीं लगती है। ऑनलाइन क्लास नहीं लगा सकते क्योंकि किसी के पास स्मार्ट फोन नहीं है तो कहीं इंटरनेट की दिक्कत है। कई स्थानों पर बच्चे छत पर बैठकर पढ़ते हैं क्योंकि घर के भीतर नेटवर्क नही रहता है।”
-संतोष खड़िया, शिक्षक चुहकीमार
साभार: दैनिक भास्कर


