स्त्रियों को राजनीति में बेशक होना चाहिए लेकिन स्त्री पर राजनीति नहीं होना चाहिए : आशा त्रिपाठी
रायगढ़। 11 दिसंबर
“अधिकतर लड़कियां सहमति से संबंध बनाती हैं, लिव-इन में रहती हैं बाद में रेप का आरोप लगाकर केस दर्ज कराती हैं” : डॉ. किरणमयी नायक, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक जी हैरान हूं मैं आपके इस वक्तव्य से, आप वर्तमान में जिस पद पर हैं और पूर्व में जिस पद को सुशोभित कर चुकीं हैं ऐसे व्यक्ति खासकर स्त्री का ऐसा कथन न केवल उनके पदों के गरिमा के विपरीत हैं बल्कि पूरी स्त्री जाति के साथ अश्लीलता की हद तक दिया गया एक गैर-जिम्मेदाराना बयान है। कम-से-कम महिला आयोग जैसा मंच जो महिला को न्याय, सुरक्षा और संरक्षण देने के बना है उसी के अध्यक्ष का इस प्रकार का बयान इस मंच के औचित्य पर सवाल खड़ा कर जाता है। इस तरह आपने एक तरीके से महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और अन्याय का न केवल समर्थन किया है बल्कि आपने अपराधियों की औसला-अफजाई भी की है। आपने सहमति और लिव-इन रिलेशनशिप रिश्तों की बात की है तो आप क्या यह बताएंगी कि छत्तीसगढ़ में रहने वाली स्त्रियों का कितना प्रतिशत लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है और कितनों ने इस तरह का अपराध दर्ज कराया है। अगर आपको इसका भान नहीं तो महज चंद लड़कियों के उदाहरण के आधार पर पूरी स्त्री जाति पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी नहीं किया जा सकता और जहां तक सहमति की बात है तो ज्यादातर सहमतियों के पीछे उसे हासिल करने की क्रूरता भी छिपी होती है। या फिर स्त्री की कोमल भावनाओं का भावनात्मक शोषण होता है। इस बीच बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि बेशक हुई है और यदि हम विश्लेषण करें तो उसके पीछे अनेक पहलुओं पर भी तर्क किया जा सकता है। मसलन सोशल मीडिया या इंटरनेट, फिल्में, सीरियल्स और फूहड़ विज्ञापन वगैरह लेकिन आपने तो सिरे से सभी को खारिज करते हुए एक निर्णायक बयान दे दिया जो आपकी जैसी जिम्मेदार महिला नेत्री को नहीं देना था। स्त्रियों को राजनीति में बेशक होना चाहिए लेकिन स्त्री पर राजनीति नहीं होना चाहिए। कम-से-कम ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर।
: आशा त्रिपाठी, रायगढ़

