कोटवारों ने 50 और 100 रुपए के स्टाम्प पर ही बेच दी सेवा भूमि
जांजगीर. कोटवारी जमीन की अवैध बिक्री का मामला प्रकाश में आया है। पटवारी कार्यालय में मौजूद 1982-83 में बने निस्तार पत्रक के अनुसार नगर के तत्कालीन 3 काेटवारों को 30 एकड़ जमीन थी। उनके बाद आने वाले कोटवारों के नाम पर यह जमीन साल 2000 तक हस्तांतरित होते रही, पर उसके बाद जब कलेक्टाेरेट व एसपी कार्यालय सहित अन्य सरकारी भवन बनाए गए तो इन्हीं कोटवारी जमीन में से 21 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर ली गई। बची 9 एकड़ जमीन भी अब कोटवारों के पास नहीं है। पटवारी कार्यालय के पास खसरा नंबर 3965 की 1.51 एकड़ भूमि की बदली हो गई है। वर्तमान में सिर्फ दो कोटवारों के पास 3.27 एकड़ भूमि शेष है। तीसरे कोटवार राजेश के पास एक डिसमिल भी जमीन नहीं है। भास्कर ने मामले की पड़ताल की तो पाया कि वर्तमान में अधिकांश जमीनें कोटवारों ने स्टांप पर बिना लिखा पढ़ी के बेच दी है। कोटवार बैजनाथ बघेल के खाते में खसरा नंबर 3566 की 1.31 एकड़ भूमि सारथी मोहल्ला में दर्ज है, जो वर्तमान में बिक चुकी है। दशमत बाई के पास वर्तमान में कुल 1.96 एकड़ भूमि शेष है। 90 फीसदी जमीन स्टांप पर बेच दी है।
1982-83 के निस्तार पत्रक में इन ख. नं. का आवंटन
- साहेबलाल कोटवार- निस्तार पत्रक में खसरा नं. 923 में 36 डिसमिल, 2369 में 68 डिसमिल, 2412 में 8 डिसमिल, 2440 में 33 डिसमिल ,2897 में 86 डिसमिल, 3565 में 83 डिसमिल, 3968 में 1.29 एकड़, 5088 में 40 डिसमिल, 4354/15 में 4.55 एकड़, 4363/4 में 1.26 समेत कुल 10 एकड़ सेवा भूमि आवंटन का स्पष्ट उल्लेख है।
- पदुमलाल कोटवार- इसी तरह निस्तार पत्रक में दूसरे कोटवार के नाम से खसरा नंबर 2895 में 6 डिसमिल, 3919में 1.46 एकड़,4869 में 32 डिसमिल,1886 में 1.86 एकड़ और 4363/8 में 8.6 एकड़ समेत कुल 10 एकड़ सेवा भूमि का आवंटन का उल्लेख है।
- सोनऊराम कोटवार- तीसरे कोटवार के खाते में खसरा नं. 3566 में 1.39 एकड़, 3965 में 1.51 एकड़, 4336/5 में 6.18 एकड़, 1480 में 8 डिसमिल, 1882 में 20 डिसमिल, 1494 में 54 डिसमिल,1468 में 92 डिसमिल इनके नाम पर 10.3 एकड़ सेवा भूमि का आवंटन हुआ है।
सौ से ज्यादा मकान बने
सारथी मोहल्ले में खसरा नंबर 3566 पर 1.31 एकड़ जमीन कोटवारों ने बेच दी है। वर्तमान में यहां सौ से भी ज्यादा मकान बन चुके हैं। इसी तरह दुलारा बाई कोटवार के खाते से भी 83 डिसमिल जमीन बिक चुकी है। अधिकांश जमीनों पर रजिस्ट्री नहीं हुई है। लोगों ने 50 और सौ रुपए के स्टाम्प पर ही लिखा पढ़ी की है।
क्या है सेवा भूमि
सेवा भूमि दरअसल सरकार द्वारा दी जाने वाली भूमि होती है। यह कोटवारों को कोटवारी के बदले में दी गई जमीन है। यह किसी एक के नाम पर नहीं हो सकती। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पाया कि शहर के बीच आईबी रेस्ट हाऊस, नहर पर पूर्व सांसद निवास कमला देवी पाटले के घर के पीछे और वरूण कहरा के घर के पीछे की सेवा भूमि पर भी मकान बन चुके हैं।
कोटवार इतने सालों से अब तक चुप क्यों थे
“कोटवारों को दी गई जमीन यदि सरकारी कार्यालयों के लिए ली गई है तो उनको इसके बदले में जमीन दी गई होगी। कोटवार यदि जमीन नहीं मिलने की बात कह रहे हैं तो इतने सालों तक चुप क्यों थे। शेष जमीन की बिक्री हुई या कुछ और इसकी जानकारी नहीं है।”
-मेनका प्रधान, एसडीएम, जांजगीर
मेरे नाम पर एक डिसमिल जमीन तक नहीं
“हम तीन पीढ़ी से नगर के कोटवार हैं। मेरे दादा सोनाऊराम के नाम पर 10 एकड़ सेवा भूमि थी, इसके बाद यह भूमि मेरे चाचा के कोटवार बनते ही उनके नाम पर आ गई। वर्तमान में मैं कोटवार हूं, लेकिन मेरे नाम पर एक डिसमिल भी जमीन नहीं है।”
-राजेश कुमार, कोटवार, जांजगीर नगर
वर्तमान में मेरे पास 2.82 एकड़ है जमीन
“वर्तमान में मेरे खाते में सिर्फ 2.82 एकड़ जमीन है। इसमें से 3566 खसरा की 1.31 एकड़ सारथी मोहल्ला वार्ड नंबर 14 में मेरे कोटवार बनने से पहले ही बिक चुकी है। मेरे नाम पर जो जमीन दर्ज है, उस पर राजेश कोटवार का घर है।”
-बैजनाथ बघेल, कोटवार जांजगीर
साभार: दैनिक भास्कर

