टेंडर में पाइप बिछाने के बाद लीकेज जांच के लिए हाइड्रो टेस्ट का प्रावधान, लेकिन ठेकेदार इस पर नहीं दे रहे ध्यान
जांजगीर. नगर में पेयजल सप्लाई के लिए जल आवर्धन के तहत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। नगर में करीब 99 किमी पाइप लाइन बिछाई जानी है। अब तक करीब 35 किमी पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन लीकेज की जांच किए बगैर पाइप लाइन के ऊपर कांक्रीट डाल दिया। ऐसे में यदि पाइप लाइन में लीकेज मिला तो सड़क की दोबारा खुदाई जाएगी। इससे पब्लिक को परेशानी और पालिका को आर्थिक नुकसान भी होगा। जल आवर्धन का काम नागपुर की मल्टी अर्बन इंफ्रा सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड को मिला है। कंपनी यह काम 11 प्रतिशत अधिक दर पर लेने के बावजूद मनमानी कर रही है। इसकी पूरे प्रोजेक्ट की लागत 34 करोड़ 55 लाख रुपए हैं। इसमें कंपनी करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से 90 किमी मुख्य व डिस्ट्रिब्यूशन सप्लाई लाइन नगर में बिछाएगी। इस लागत में उन्हें सड़कों की खुदाई कर पाइप लाइन बिछानी है, फिर पाइप लाइन के लीकेज की जांच के लिए हाइड्रो टेस्ट करना है। इसके बाद ऊपर कांक्रीट की परत बिछाकर मरम्मत (रेस्टोरेशन वर्क) करना है। नगर के भीतर अबतक करीब 35 किमी का काम पूरा हो चुका है, लेकिन कही भी ठेकेदार ने लीकेज की जांच नहीं की है। जांच किए बगैर सीधे कांक्रीट डालकर सड़क की मरम्मत कर दी है। शेष राशि से बनने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, इंटकवेल भी ढाई साल बाद 30 फीसदी ही पूरा हुआ है, तो पानी की टंकियां अधूरी पड़ी हुई है।
2 इंजीनियरों की मॉनिटरिंग के बाद भी हो रही ऐसी चूक
इस काम की जिम्मेदारी पीएचई जांजगीर के एसडीओ गोपाल ठाकुर और नगर पालिका के सब इंजीनियर नारायण आदित्य को सौंपी है। दोनों की निगरानी में मल्टी अर्बन इंफ्रा सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड नाम फर्म को यह काम मिला है, पहले तो भुगतान में देरी की वजह से काम रोका, अब बिना हाइड्रो टेस्ट के रेस्टोरेशन करा रहे हैं।
सड़क खोदनी न पड़े इसलिए कराया जाता है हाइड्रो टेस्ट
टेंडर के मुताबिक पाइप लाइन बिछाने के बाद हाइड्रो टेस्ट और आखिर में कांक्रीट डालने का (रेस्टोशन वर्क) काम किया जाना है, दूसरे निकायों में किए जा रहे जल आवर्धन व अमृत मिशन के तहत इसी क्रम में काम किया जा रहा है। रायगढ़ पीडीएमसी के इंजीनियर अविनाश पंडा ने बताया कि पाइप बिछाने के बाद सड़क दोबारा खोदने की जरूरत न पड़े इसलिए सभी निकायों के टेंडर में अनिवार्य रूप से हाइड्रो टेस्ट के बाद सड़क की मरम्मत का प्रावधान होता है।
सीधी बात
प्रकाश आर्यन, प्रो. मैनेजर मल्टी अर्बन इंफ्रा सर्विसेस
सवाल – बगैर हाइड्रो टेस्ट सड़कों की मरम्मत क्यों कराई जा रही है,
- हाइड्रो टेस्ट सप्लाई शुरू करने के बाद की जाएगी, अभी परेशानी न हो इसलिए मरम्मत करा रहे हैं।
सवाल – हाइड्रो टेस्ट के दौरान लीकेज मिला तो क्या फिर सड़क खोदेंगे? - इसकी संभवना कम है, लेकिन टेस्टिंग में लीकेज मिला तो फिर से सड़क खोदनी पड़ेगी।
सवाल – बार-बार सड़क न खोदनी पड़े इसलिए टेंडर में हाइड्रो टेस्ट का प्रावधान है? - टेंडर में हाइड्रो टेस्ट का प्रावधान है, लेकिन पब्लिक को परेशानी न हो इसलिए नहीं करा रहे।
सवाल – बार-बार सड़क की खुदाई से लोगों की समस्या कम नहीं होने वाली? - पाइप लाइन, डब्ल्यूटीपी के ट्रायल बाद ही हम प्रोजेक्ट हैंडओवर करेंगे।
डीआई में रबर गास्केट सही नहीं तो लीकेज का डर
“डीआई पाइप में जैक पुसिंग तकनीक से दो पाइप को आपस में ज्वाइंट किया है। इस तकनीक में पूरा खेल रबर व गास्केट का होता है। ज्वाइंट करते समय दोनों पाइप में सही ढंग से नहीं बैठा तो लीकेज का डर सप्लाई के दौरान रहता है। ”
-एके कौशिक, सिविल आर्किटेक
चूक हुई तो पालिका जिम्मेदार होगी: ठाकुर
“पालिका में इंजीनियर नहीं होने के कारण मुझे उस समय अटैच किया था। रही बात काम में किसी तरह चूक की तो इसकी जिम्मेदारी पालिका की होगी। हम तो फाइनल टेस्टिंग तक कंपनी से काम लेंगे और फिर पालिका को हैंडओवर करेंगे।”
-गोपल ठाकुर, एसडीओ पीएचई
साभार: दैनिक भास्कर


