रायगढ़. पूर्व महापौर व कांग्रेसी नेता जेठूराम मनहर ने कलेक्टर से की शिकायत, आरोप: कुछ साल पहले ऐसी ही योजना के लिए पाइपलाइन बिछा चुके तो नई योजना के नाम पर फिजूलखर्ची क्यों
अक्सर बजट की कमी से जूझने वाले नगर निगम के अफसर राजस्व बढ़ाने जोर लगा रहे हैं लेकिन फिजूलखर्ची रोकने पर ध्यान नहीं है। घरों में पानी सप्लाई के लिए 10 साल शुरू हुई जल आवर्धन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। योजना को बेहतर बनाने के लिए अमृत मिशन आ गया, लेकिन जिन वार्डों में पहले से पाइपलाइन डली है वहां फिर पाइप बिछाने की तैयारी चल रही है। पूर्व महापौर कांग्रेस नेता जेठूराम मनहर ने कलेक्टर भीम सिंह से शिकायत की है। जेठूराम ने आशंका जाहिर की है कि कुछ वार्डों में ऐसा किया भी गया होगा।
शिकायत पत्र में यह बात
जेठूराम ने मंगलवार को कलेक्टर भीम सिंह को शिकायती पत्र दिया। उन्होंने बताया, वार्ड 4 और 5 में अमृत मिशन के तहत पाइप बिछाया जा रहा है। यहां पहले ही जल आवर्धन योजना के तहत पाइप बिछाया जा चुका है और पानी की सप्लाई लगातार हो रही है। जेठूराम ने कहा, जल आवर्धन योजना के तहत 45 फीसदी तक पाइप डाले जा चुके हैं। ऐसे में जहां पाइप डाले जा चुके हैं उसे अमृत मिशन योजना से कनेक्ट कर दिया जाए तो दूसरी लाइन बिछाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लाखों रुपए बच सकते हैं, फिजूलखर्ची नहीं रुकी तो इसका भार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कलेक्टर से इसकी जांच कराने और दोबारा लाइन डालने को रुकवाने की मांग की है।
नई योजना का बजट मिला तो पुरानी भूल गए
ये जल आवर्धन – 2007-08 में जल आवर्धन योजना शुरू की गई थी। पहले लगभग 18 करोड़ रुपए का इस्टीमेट बना फिर 48 करोड़ रुपए लागत का इस्टीमेट बना। लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च भी हुए लेकिन योजना अधूरी रही। नगर निगम (पहले 38 वार्ड) में 14 टंकियों के जरिए घर-घर में शुद्ध पानी पहुंचाने की मंशा के साथ शुरू हुई इस जल आवर्धन योजना के तहत 2016 के आखिर तक नगर निगम और पीएचई की देखरेख में 87 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई। जल आवर्धन योजना में शहर के बीच लाल टंकी, टाउन हॉल वाली टंकी और जूट मिल क्षेत्र की काली टंकी से पानी लेने वाले मोहल्लों को शामिल नहीं किया गया था।
अमृत मिशन योजना – केंद्र सरकार की अमृत मिशन योजना लॉंच हुई। 2017 में शहर में सर्वे शुरू किया गया। निगम की टीम ने ही इस्टीमेट बनाया लेकिन जल आवर्धन में बिछी पाइप लाइन को नजरअंदाज कर दिया। फरवरी 2018 में वर्क ऑर्डर जारी हुआ। 30 महीने में अमृत मिशन का काम पूरा होना था लेकिन अभी 20 प्रतिशत से ज्यादा काम बाकी है। शहर की ज्यादातर नई-पुरानी सड़कें खोदी गई हैं। अमृत मिशन 131 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। 369 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछनी है। 48 वार्डों में इसके तहत 36 हजार घरों में पानी पहुंचना है। 26 हजार घरों में पानी की सप्लाई शुरू भी की जा चुकी है। निगम के अफसर अप्रैल तक योजना पूरी होने का दावा कर रहे हैं।
ध्यान दें तो बच सकते हैं लाखों रुपए
अमृत मिशन योजना शुरू करने से कुछ महीने पहले तक जल आवर्धन योजना का काम चल रहा था। जितनी पाइपलाइन बिछ चुकी थी उसे नई योजना में शामिल कर लेते तो लाखों रुपए बच जाते। सड़कों की खुदाई, फिर बनवाई पर भी न केवल लाखों रुपए बचते बल्कि शहर के लोगों को परेशान नहीं होना पड़ता। नगर निगम में चकाचक सड़क का दोबारा टेंडर करने, बिना निर्माण किए ठेके की राशि निकाल लेने के मामले अक्सर सामने आते हैं।
साभार: दैनिक भास्कर

