गुरु बिन ज्ञान नही, दीपक की लौ है गुरु=रामचंद्र शर्मा
(गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आलेख)
आज एक ऐसा दिन है कि हम कितने ही बड़े हो जाएं, कितने ही अमीर हो जाएं, कितने ही ज्ञानी हो जाएं, कितने ही बड़े पद पर आसीन हो उसके बाद भू आज के दिन झुकने का होता है, उस महान शख्सियत के सामने, उनकी याद में, उनके स्नेह, प्यार, अहसान के बदले झुकने का। उस महान शख्सियत को हम गुरु, शिक्षक के नाम से संबोधित करते हैं। मेरी नजर में हर वह व्यक्ति हमारा गुरु है जिसने हमें जीवन के हर क्षेत्र में, हर मोड़ पर कुछ न कुछ सिखाया है, वो हमारे स्कूल के शिक्षक तो है ही साथ में वो हमारे माता पिता भी है, वो हमारे स्पोर्ट टीचर भी है, वो हमारे एनसीसी प्रशिक्षक भी है, हमारे बड़े भाई बहन भी है, हमारे अपने दोस्त भी है बल्कि मैं तो मानता हूं कि हमारे ऐसे प्रतिद्वंदी और दुश्मन भी है जिन्होंने हमें सिखाया कि बुरे लोग कैसे होते हो, अर्थात जीवन के हर मोड़ पर शिक्षा देने वाला हमारा गुरु है। अक्सर हम ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं तो हम उन सीढ़ी रूपी गुरु को भूल जाते हैं जिनके चलते हमने वो मुकाम हासिल किया है। बस यहीं हमारे संस्कार झलकते है कि हमने कितना सीखा और पालन किया इसका पता चलता है। व्यक्तिगत रूप से यह मानता हूं कि माता पिता के बाद केवल गुरु 4ही एसी महान शख्सियत हैं जो किसी भी स्थिति में अपने शिष्य के बुरा नही सोचता। आज सभी के माध्यम से उन सभी 4गुरुओं को प्रणाम करते हैं जिनके कारण हम सब अपनी अपनी बेहतर स्थिति में है। सभी माता पिता और गुरुजनों को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर कृतज्ञता प्रकट करता हूं सादर प्रणाम और चरणस्पर्श। आप सभी का आशीर्वाद सदा ही बना रहे।
सभी को गुरु पूर्णिमा की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
कृतज्ञ बने धन्यवाद
एक अदना सा शिष्य
रामचंद्र शर्मा

