खरसिया। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल के विधायकी क्षेत्र खरसिया में लगातार एक के बाद एक राशन वितरण सम्बंधित समस्याएं निकल कर आ रही हैं। पूर्व में मदनपुर पंचायत में राशन घोटाले का मामला प्रकाश में आया था और अभी वर्तमान में महका पंचायत से राशन वितरण में बड़ी गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है।
गांव वालों की माने तो राशन दुकान संचालक चंदैनी श्रीवास द्वारा गरीबों के हक के चावल को बंदरबाट किया जा रहा है। बता दें ये वही संचालक हैं जिनके खिलाफ राशन दुकान को नियमित न खोलने की शिकायत लेकर तेलिकोट के ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। संचालक द्वारा राशनकार्ड में 60 किलो लिखकर हितग्राही को केवल 50 किलो चावल दिया जा रहा है। जब इस सम्बंध में ग्रामीणों ने संचालक चंदैनी श्रीवास से बात की तो उनका कहना है कि सभी को चावल सही मात्रा में दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि चावल वहां तो कम तौल कर दिया जा ही रहा है, साथ ही जब हितग्राही उसको अपने घर पर लाकर तौल रहे हैं तो उसका वजन और कम आ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनको लाकडाउन में भी शासन द्वारा दिया गया बोनस चावल नहीं दिया गया था। वहीं लॉकडाउन के चावल का भी पैसा लिया गया था। महका पंचायत में कुल 677 राशन कार्ड हैं और प्रत्येक कार्ड के पीछे लगभग 5 से 10 किलो का घोटाला किया जा रहा है, तो एक माह में पंचायत में संचालक द्वारा लाखों की चावल का हेराफेरी किया जा रहा है।
नान घोटाले से ज्यादा उचित मूल्य की दुकानों में घोटाला
खरसिया में करीब 100 पीडीएस दुकानें संचालित हो रही हैं, वहीं प्रत्येक में चावल की अफरातफरी की जा रही है। इस हिसाब से देखा जाए तो यहां हर महीने होने वाला घोटाला नान घोटाले से भी बड़ा है, जबकि इस पर शासन के नुमाइंदे आंख बंद किए बैठे हुए हैं। जानकारी के अनुसार अक्टूबर माह में खरसिया नगर पालिका क्षेत्र के 18 वार्डों में करीबन 10000 क्विंटल चावल को अफरा-तफरी करने का मामला सामने आ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के लिए जो राशन दिया जा रहा है, उसमें रजिस्टर में 45-50 किलो प्रति व्यक्ति लिखा जा रहा है, जबकि 35 किलो चावल ही प्रति व्यक्ति को दिया जा रहा है। ऐसा सभी दुकानों में चल रहा है। अक्टूबर माह में सर्वर डाउन है कहकर लोगों को चावल नहीं दिया गया और उसके बाद नवम्बर माह में वो चावल दिया जाना है। क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा जिनके दुकानों में बचत चावल था, उसे कटौती कर चावल दिया जा रहा है। परंतु दुकानों में चावल गायब है। उनके द्वारा खरसिया में ब्लैक में चावल बेच दिया गया है और दुकानों में स्टाक नहीं है। अब जब नवंबर माह में जो चावल पूर्ति करना है बचत चावल को काटने के बाद उन्हें स्टाक दिया जा रहा है। जिसके कारण उपभोक्ताओं को चावल ना होने के कारण उन्हें घुमाया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा चावल पूर्ति नहीं की गई है, इसलिए चावल देने में असमर्थ हैं।
1 दिन में अधिकतम 3 दुकानों का सर्वे
फूड इंस्पेक्टर से चर्चा करने पर बताया गया कि यहां कुछ दुकानों में गड़बड़ है, उनका स्टाक वेरिकेशन तथा मशीन द्वारा जो दस्तखत करवाए गए हैं, उसमें मिलान करके सही स्थिति का पता लगाया जाएगा। वहीं कहा कि प्रतिदिन 3 दुकानों से ज्यादा की जांच नहीं की जा सकती। ऐसे में तो यह माह पूरा जांच में ही निकल जाएगा और हितग्राही अपनी चावल से वंचित रह जाएंगे। हालांकि फूड इंस्पेक्टर ने कहा कि यदि नवम्बर माह में उपभोक्ताओं को पर्याप्त चावल नहीं मिलेगा तो दिसंबर माह में समस्त उपभोक्ताओं को उसकी पूर्ति कर उनके हक का चावल दिलाया जाएगा। परंतु खरसिया के उचित दुकानदार शुरू से ही कालाबाजारी कर रहे हैं। वहीं 10 से 15 तारीख तक तो दुकान खोलते ही नहीं। अतः उनसे जनता को उम्मीद नहीं है। जनता द्वारा बार-बार अनुविभागीय अधिकारी खरसिया से शिकायत की जाती हैं, परंतु इसकी और कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह भी जानकारी मिली है कि यह समस्त चावल खरसिया के राइस मिलों में और खरसिया के एक चावल खरीददार को बेचा जाता है।
हितग्राहियों को कह रहे झूठ
अन्य विकासखंडों में कुछ दुकानदारों ने एफआईआर होने की संभावना होने के कारण यह कबूल किया कि हम उपभोक्ताओं को उनके हक का चावल देंगे। परंतु यह खरसिया के उचित मूल्य की दुकानों द्वारा कोई भी आश्वासन उपभोक्ताओं को नहीं दिया जा रहा। बल्कि 12:00 बजे दुकान खोलते हैं, उसके बाद में 4:00 बजे दुकान बंद कर अपने घर चले जाते हैं और यह कह दिया जाता है कि चावल खत्म हो गया है, चावल आने पर ही हम चावल देंगे। ऐसा महसूस होता है कि उपभोक्ताओं को फूड इंस्पेक्टर द्वारा भी अंधेरे में रखा जा रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार से मांग है कि इसकी सूक्ष्म जांच की जाए। यह तो नान घोटाले से भी बड़ा घोटाला है, क्योंकि खरसिया तहसील में करीब 100 दुकानें हैं और करीब-करीब हर दुकानों में 100 क्विंटल चावल के अनुपात में चावल नहीं है। इस प्रकार कुल 10000 क्विंटल चावल की गोलमाल होने की संभावना है। केंद्र सरकार गरीबों का हित चाहती है, पर हितग्राहियों को उचित मूल्य दुकानदारों द्वारा पर्याप्त चावल नहीं दिया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

