तमनार. अंतर्गत सुदूर क्षेत्र में बसे आमगॉंव के बेहद साधारण कोल्ता परिवार में जन्मे कृष्ण चन्द्र खम्हारी एक किसान हैं । जिन्होंने बड़े संघर्षों से अपने बच्चों को पढ़ाया लिखाया बड़ा किया एवं अच्छी परवरिश दी,मिशाल ऐसी कि मोतिया बिंद के आपरेशन के लिए जुटाए पैसे भी बच्चों के पढ़ाई में लगा दिए । ऐसे अनगिनत किस्से हैं जो प्रेरित करते हैं,हाल ही में एक नये पहल के तहत उन्होंने शिक्षा एवं साहित्य सेवा हेतु प्रत्येक वर्ष विद्यादान सम्मान देने का संकल्प लिया था जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर आवेदन मंगाए गए ।
अपने पिता दानी राम खम्हारी एवं चाचा विद्याधर खम्हारी के नाम को जोड़ कर यह सम्मान का नामकरण किया गया है,बचपन से ही पढ़ने में अच्छे होने के बावजूद न पढ़ पाने एवं शेष भाईयों आ.चंद्रमणि खम्हारी,हरिबंधु खम्हारी एवं जदुमणि खम्हारी के शैक्षिक उपलब्धियों को समाज को संदेश देने के उद्देश्य से ताकि सभी युवा शिक्षा प्रति उत्साहित हों,यह सम्मान निर्धारित किया गया था भारतवर्ष से लगभग 400प्रतिभागियों में चयनित प्रतिभागी छन्दाचार्य श्री रामनाथ साहू ‘ननकी’ जो कि विगत कई वर्षों से छंद महालय के माध्यम से नि:शुल्क छंद ज्ञान देते हैं जिसमें विविध क्षेत्र से हजारों साधक लाभान्वित हो रहे हैं । छंद साधना से प्रेरित कृति गीत संग्रह ‘काव्य-कामिनी’ रचयिता आ.ननकी जी को निश्चित धन राशि,प्रमाण पत्र, मोमेंटो एवं शाल श्रीफल से अलंकृत व अपनी साहित्य साधना से समाज को प्रेरित करते रहने के अपेक्षित आश्वासन से “विद्यादान सम्मान” से सम्मानित किया गया ।
यह भव्य आयोजन रेलवे विभाग के द्वारा संचालित हुआ जिसमें एक साथ शेष और 21 सम्मान भी प्रदान किया किया गया ।
यह सम्मान कवि लोक साहित्य परिषद के तत्वावधान में किया गया जिसमें कृष्ण चन्द्र खम्हारी के ज्येष्ठ पुत्र गुलशन खम्हारी प्रमुख भूमिका में रहे। विद्यादान सम्मान के लिए न्यूनतम योग्यता नि:शुल्क शिक्षा/ट्युशन/साहित्य में प्रवीण शिक्षक/गुरु की उपलब्धियों के आधार पर आंकलन किया था,तथा साहित्यकार किताब का भी प्रकाशन किये हों।जिसपर खरा उतरकर रामनाथ साहू ननकी जी इस सम्मान के हकदार बने। उनके इस सम्मान से खुश होकर बिलासा शिक्षा संस्थान के समस्त साहित्यकारों और छंद साधकों ने शुभकामनाएं दी है ,साथ इस सम्मान की शुरुवात के लिए गुलशन खम्हारी जी की मुक्त कण्ठ से प्रसंशा हो रही है,और इस काम के लिए सभी ने शुभकामनाएं दी है।


