गौरेला पेंड्रा मरवाही, 27 अप्रैल 2025: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के तहत ओडिशा से लौट रहे एक तीर्थयात्री, कन्हैया लाल पुरी, की झारसुगुड़ा रोड स्टेशन पर अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव में शोक और गुस्सा पैदा कर दिया है, क्योंकि उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिली।
कन्हैया लाल पुरी, जीपीएम जिले के लालपुर गांव के निवासी थे और अपनी पत्नी के साथ 24 अप्रैल को बिलासपुर से ओडिशा की तीर्थयात्रा पर निकले थे। वे पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन कर लौट रहे थे, जब उनकी तबीयत सुबह झारसुगुड़ा रोड स्टेशन पर अचानक बिगड़ गई।
सहयोगी तीर्थयात्री, जिन्होंने स्थिति को गंभीरता से लिया, ने स्टेशन पर रेलवे और संबंधित अधिकारियों को कई बार सूचित किया, लेकिन उपचार की कोई व्यवस्था नहीं की गई। कन्हैया लाल की पत्नी भी उनके साथ थीं, लेकिन दो घंटे तक समुचित चिकित्सा न मिलने के कारण उनकी तबीयत और बिगड़ गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।
यह घटना तीर्थयात्रियों के बीच व्यापक आक्रोश का कारण बनी है। लोगों ने हैरानी जताई है कि एक सरकारी योजना के तहत यात्रा कर रहे लोगों के लिए प्राथमिक चिकित्सा सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं थी। बुधवार को इस घटना का पता चलने पर कन्हैया लाल के गांव में शोक की लहर दौड़ गई और उनके परिवार के सदस्य व ग्रामीण दुखी हैं।
मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना का उद्देश्य वृद्धों को धार्मिक स्थलों का दर्शन कराने का है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर उस योजना की कमियों को उजागर किया है। तीर्थयात्रा के दौरान चिकित्सा सुविधाओं का न होना और तत्काल सहायता का अभाव एक गंभीर चिंता का विषय है। अगले चरण में स्थानीय प्रशासन को इस घटना की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
यह घटना सिर्फ एक यात्री की मौत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण हैं, विशेषकर ऐसे कार्यक्रमों के दौरान। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

