कोरबा जिले में एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या ने चिंता का विषय बना दी है, जहां मड़वा रानी स्कूल के पास राखड़ डंपिंग से धूल का निर्माण हो रहा है। यह धूल न केवल विद्यालय परिसर और क्लासरूम तक पहुंच रही है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और बच्चों व शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन गई है। स्कूल के पास भारी मात्रा में राखड़ डंप किए जाने से स्थिति गंभीर हो गई है, खासकर जब से यह नियमों के विरुद्ध है कि विद्यालय परिसर के 100 मीटर की परिधि में राखड़ डंप करना प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, स्थानीय राइस मिल निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर राखड़ का डंपिंग किया जा रहा है, जिससे धूल का स्तर बढ़ गया है।
राखड़ डंपिंग के कारण रोजाना भारी वाहन स्कूल के पास से गुजरते हैं, जो दुर्घटना का खतरा भी पैदा कर रहा है। विद्यालय के चेयरमैन लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर से शिकायत की है। कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण मंडल को कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन विभाग ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। विद्यालय ने अपने परिसर में खेल मैदान और बंजर भूमि पर ऑक्सीजोन बनवाए हैं, ताकि क्षेत्र का पर्यावरण बेहतर हो, लेकिन राखड़ की डंपिंग से इन प्रयासों को भी खतरा है।
आंधी-तूफान के कारण राखड़ उड़कर पूरे क्षेत्र में फैल रही है, जिससे ग्रामीणों, शिक्षकों और बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। बच्चे बर्तनों में धूल जमने की शिकायत कर रहे हैं और अभिभावक भी अपने बच्चों को हो रही परेशानियों को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि राइस मिल निर्माण के लिए सैकड़ों हाइवा राखड़ डंप कर रहे हैं, जो पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। इस निर्माण से भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य और क्षेत्र के पर्यावरण पर और भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यह समस्या केवल स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और राहगीरों के लिए भी खतरा है। उन्होंने संबंधित विभाग से तत्काल कार्रवाई कर राखड़ डंपिंग पर रोक लगाने की मांग की है। इस पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों और ग्रामीणों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे।


