जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में सात मई को देश के कई संवेदनशील स्थानों पर मॉकड्रिल आयोजित की जा रही है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में आज इस मॉकड्रिल का आयोजन किया जा रहा है, जहां भिलाई स्टील प्लांट जैसे राष्ट्रीय महत्व के औद्योगिक संस्थान मौजूद हैं।
दुर्ग-भिलाई में मॉकड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन स्थिति से निपटने की वास्तविक तैयारी को परखना है। इस अभ्यास के दौरान हवाई हमले की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा, संयंत्रों की सुरक्षा, और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली का मूल्यांकन किया जाएगा। मॉकड्रिल में एयर रेड वार्निंग सायरनों की जांच की जाएगी और जनता को उसके महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही ब्लैकआउट, संयंत्रों की कैमुफ्लाजिंग, और निकासी योजनाओं का भी पूर्वाभ्यास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अभ्यास को नागरिक सुरक्षा और जागरूकता का अहम माध्यम बताते हुए अधिकारियों को इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। मॉकड्रिल में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ जैसे आपदा प्रबंधन बलों के साथ-साथ सिविल डिफेंस, छात्र, और स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
इस राष्ट्रीय अभ्यास के तहत पूरे देश के 244 स्थानों पर नागरिक सुरक्षा प्रतिष्ठानों में अभ्यास किया जा रहा है। इसमें दुर्ग सेकंड कैटेगरी में शामिल है। राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, और पूर्वोत्तर राज्यों के सीमावर्ती जिलों में भी इसी प्रकार की मॉकड्रिल की जा रही है। इसका मकसद किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की नागरिक सुरक्षा मॉकड्रिल पिछले 54 वर्षों में पहली बार हो रही है। पिछली बार ऐसा अभ्यास 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान किया गया था। तब यह अभ्यास युद्ध की विभीषिका में नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए किया गया था। आज, एक बार फिर, देश एक संभावित खतरे के लिए तैयारियों की कसौटी पर खुद को परख रहा है।


