डोंगरगढ़ विकासखंड में बरसात के मौसम में लापरवाही जानलेवा साबित हुई। ग्राम कोलेंद्रा और ठाकुर टोला के बीच स्थित नाले को पार करते समय मिथिलेश वर्मा नामक युवक तेज बहाव में बह गया। देर रात तक चली खोजबीन के बाद ग्रामीणों और पुलिस की मदद से उसका शव बरामद किया गया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, मृतक युवक मिथिलेश खैरागढ़ से लौट रहा था। ठाकुर टोला मार्ग से गुजरते हुए उसने पैदल नाला पार करने की कोशिश की। उसी समय डंगोरा डैम से छोड़े गए पानी और लगातार हो रही तेज बारिश से नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया। मिथिलेश स्टॉप डैम से गुजर रहा था, तभी उसका पैर फिसला और वह तेज धारा में बह गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि किसी की कोशिश काम नहीं आई।
प्रशासन और विभाग पर सवाल
इस हादसे ने प्रशासन और स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता बेहद खतरनाक था, बावजूद इसके कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया और न ही रास्ता बंद किया गया। ऐसे में हादसा होना तय था।
एसडीओ की सफाई
जल संसाधन विभाग के एसडीओ असद सिद्दीकी ने बताया कि ढारा और देवकट्टा जलाशय से छोड़े गए पानी के कारण नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। एनिकट के ऊपर से पानी बह रहा था। विभाग ने सभी गेट खोल दिए थे, केवल एक गेट जाम है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे हालात में लोगों को इस रास्ते से गुजरने से रोकना चाहिए था। ग्राम पंचायत को रास्ता बंद कर देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरती, जिससे यह हादसा हुआ।

हादसे के बाद शोक और गुस्सा
युवक की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने भी इस हादसे को प्रशासनिक लापरवाही बताया और कहा कि यदि समय रहते रास्ते को बंद किया जाता तो यह जान नहीं जाती। अब लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन ऐसे खतरनाक रास्तों पर पुख्ता इंतजाम करे और चेतावनी के बोर्ड लगाए।

