छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां पुलिस और सुरक्षा बलों को नक्सल मोर्चे पर एक और बड़ी सफलता मिली है। कुल 20 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 9 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में एक हाईकोर महिला नक्सली भी है। इन सभी पर मिलाकर 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण के पीछे कारण
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अलग-अलग संगठनों और पदों से जुड़े हुए थे। इनमें पार्टी सदस्य, सक्रिय संगठन सदस्य और सहयोगी शामिल हैं। इन नक्सलियों ने सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। खासकर “निरंतर नैला नार” अभियान ने इन पर गहरा असर डाला। इस अभियान का उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाकों में संवाद बढ़ाकर विकास और शांति की राह खोलना है।
सुरक्षा बलों की भूमिका
आत्मसमर्पण की इस प्रक्रिया में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), सीआरपीएफ की बटालियनें, कोबरा फोर्स और इंटेलिजेंस विंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाकर नक्सलियों पर दबाव बनाया, साथ ही उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का विकल्प भी दिया।
पुनर्वास नीति के लाभ
छत्तीसगढ़ शासन की नई पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने वाले हर नक्सली को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास की अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
सरकार की बड़ी सफलता
सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में 20 नक्सलियों का एक साथ आत्मसमर्पण करना सुरक्षा एजेंसियों और सरकार दोनों के लिए बड़ी सफलता है। यह घटना इस बात का संकेत है कि शासन की पुनर्वास योजनाएं असर दिखा रही हैं और नक्सली अब हिंसा छोड़कर शांति और विकास की राह पर लौटना चाहते हैं।
सुकमा में हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह न केवल सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी राहत की खबर है। अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे।

