जशपुर. सिविल हॉस्पिटल के अलावा आठ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ लगभग 108 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी मांगो को लेकर दो दिन की हड़ताल शुरू कर दी। जिसके बाद हाॅस्पिटल की व्यवस्था चरमराई नजर आई। अपनी कुछ मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने दो दिन की हड़ताल का एलान किया था। उनकी मांगों पर शासन ने ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण कर्मचारी सोमवार से हड़ताल पर चले गए। ब्लाॅक के उपस्वास्थ्य केन्द्रों में लगभग 108 कर्मचारी तैनात हैं। हड़ताल पर जाते ही चिकित्सा व्यवस्था चरमराई नजर आई। ओपीडी में सोमवार को स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं थी। आईसीयू का हाल भी बुरा रहा। अस्पताल में उपचार करने के लिए डॉक्टर तो मौजुद थे पर कोई स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं था। ड्रेसिंग रूम में छोटी मोटी दुर्घटनाओं के बाद इलाज कराने आने वाले मरीजाें काे बैरंग लौटकर निजी क्लीनिकों का सहारा लिया। प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने कुछ मांगो को लेकर हड़ताल का फरमान जारी किया था। जिस पर शासन की प्रतिक्रिया नहीं आने से जिले के लगभग 584 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दो दिन की हड़ताल कर दी।
कोरोना के संक्रमण का मांगो पर भी दिखा असर
कोरोना संक्रमण ने असर स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों पर भी छोड़ दिया है। संघ के तहसील अध्यक्ष पवन वैष्णव ने बताया कि जिस समय पूरा विश्व कोरोना संक्रमण से ग्रसित था और लोग घर से भी बाहर निकलने में परहेज कर रहे थे उस दौरान स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जान जोखिम मे डालकर संक्रमित मरीजों की पहचान के अलावा उन्हें इलाज मुहैया कराया। उस दौरान अनेक स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान भी गंवाई पर स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रति मौजूदा शासन ने जरा भी संवेदना नहीं दिखाई।
स्वास्थ्य कर्मियों की मृत्यु होने से संघ में आक्रोश
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष पवन वैष्णव ने कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान हुई स्वास्थ्य कर्मचारियों की मृत्यु पर आक्रोश जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि महामारी के इस कठिन दौर मे जनसेवा को जनार्दन सेवा समझने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों की मृत्यु पर भी शासन न बेरुखी नहीं छोडी। प्रदेश मे अब तक 22 स्वास्थ्य कर्मचारी अधिकारियों ने अपनी जान गंवा चुके हैं। सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमण से इलाज करने के दौरान कोरोना संक्रमण में ग्रसित हो चुके हैं।

