11 साल बाद भी खेतों तक नहीं पहुंचा डेम का पानी, डेढ़ गुना बढ़ी लागत
रायगढ़. नहरों की मरम्मत और निर्माण कार्यों के नाम पर केलो परियोजना ने पांच साल में 72 करोड़ 12 लाख रुपए खर्च कर दिए लेकिन 11 साल बाद भी ना तो नहरें बन पाई हैं और किसानों को पानी मिल पा रहा है। नहरों में एक फीट की भी गहराई नहीं है। नहरें हर साल टूट जाती हैं जिससे करोड़ों लीटर पानी बेकार बह जाता है। केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक केलो परियोजना में निर्माण और मरम्मत के नाम पर हर साल करोड़ों खर्च हो रहे हैं। नहर के नाम पर नालियां बना दी गई है। शनिवार को भास्कर की टीम ने टेंगापाली नहर के पास पड़ताल की। यह वितरक नहर है। नहर में कोई लाइनिंग वर्क नहीं है। इसलिए पानी ठहर नहीं पाता। ना ही उसकी कोई रफ्तार होती है। लगातार मिट्टी के कटाव से नहरें कमजोर होकर टूटने लगती है। नहरों का काम पूरा होने पर हर साल 22 हजार 810 हेक्टेयर को सींचने का लक्ष्य है। लेकिन बीते पांच सालों में नहर से 8 हजार हेक्टेयर में भी सिंचाई नहीं हो पाई है।
इस तरह से 5 सालों में निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च हुई राशि
साल – राशि करोड़ में
2016-17 – 17.07
2017-18 – 12. 88
2018-19 – 19.99
2019-20 – 14.55
2020-2021 – 7.63
हर साल टूट जाती है नहर
सितंबर में झारमुड़ा ब्रांच केनाल दो जगहों पर फूट गई थी। अफसर लगातार खबर को दबाने के चक्कर में लगे रहे। इसी तरह 2019 में भी शाखा नहर और माइनर नहरें बही थी। इसी तरह 2018 में भी मुख्य नहर बह गई थी। हर बार जांच टीम बनी, रिपोर्ट गई। लेकिन अफसरों पर कोई आंच तक नहीं आई। अफसर लगातार लापरवाही करते रहे।
लाइनिंग वर्क इसलिए है जरूरी
जल संसाधन से रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर जेएन पटले के अनुसार किसी भी नहर में लाइनिंग वर्क बेहद जरूरी है। इससे पानी के फ्लो के साथ मिट्टी का कटाव भी रुकता है। नहरों में लाइनिंग वर्क होने पर ही पानी नहर के टेल तक पहुंच पाती है। लेकिन केलो प्रोजेक्ट में शाखा और माइनर नहरों के लिए लाइनिंग वर्क ही नहीं दी गई है। अभी फिलहाल शाखा नहर में लाइनिंग के लिए टेंडर निकालने की बात विभाग कह रहा है।
11 सालों से बढ़ रही मियाद
वर्ष 2009 में 598 करोड़ रुपए के साथ नहर निर्माण का काम शुरू किया गया था, वर्तमान में लागत एक हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्य नहर की लंबाई 28.32 किमी है। अभी भी मुख्य नहर में निर्माण कार्य बाकी है। वास्तविकता कुछ और ही है, लाइनिंग वर्क केवल मुख्य केनाल में ही की गई है।
जल संसाधन मंत्री से कर चुका हूं शिकायत
“मेरे द्वारा मामले में जल संसाधन मंत्री से शिकायत की जा चुकी है। पहले नहर पूरी करने पर हमारा जोर था। इस बार उद्देश्य है कि नहर फूटने के मामले में जांच हो। विधानसभा में भी मेरे द्वारा सवाल उठाया जा चुका है।”
-प्रकाश नायक, एमएलए, रायगढ़
“मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता, अभी कुछ भी नहीं बता सकता।”
-पी के शुक्ला, ईई, केलो परियोजना
साभार: दैनिक भास्कर

