खरसिया ब्लॉक के ग्राम तिऊर में खेती की ओर लौटा युवा वर्ग
रायगढ़. कोरोना से पहले जहां किसान पारंपरिक खेती में केवल खरीफ फसल तक ही सीमित थे वही किसान अब कोरोना काल में व्यवसायिक कृषि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। रबी फसलों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। सब्जी, उन्नत किस्म के धान, दलहन और तिलहन इत्यादि। जो किसान पारंपरिक तरीके से एक फसल ही लेते थे वह अब धान के साथ सब्जी और दलहन की फसल लेने लगे हैं। अब पढ़े लिखे युवाओं का रुझान भी खेती की तरफ बढ़ा है । खरसिया ब्लॉक के ग्राम तिऊर के रहने वाले शिक्षित युवा किसान रवींद्र गबेल ने बताया कि कोरोना काल के कारण वह खेती पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। धान की फसल लेने के बाद और अन्य कई तरह की फसल ले रहे हैं । पहले मजदूरों की कमी रहती थी जिससे 2 से 4 एकड़ में ही रबी फसल लगाते थे । मगर इस बार पलायन कम हुआ जिससे आसानी से मजदूर मिल रहे हैं अब 15 एकड़ में रबी फसल लगाई है। ग्राम भागोडीह के किसान विजय गबेल ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद उनके पास खेती का ही काम है। खरीफ फसलों के बाद 5 एकड़ से ज्यादा रकबे में टमाटर और अन्य सब्जियों की खेती कर रहे हैं। पहले धान की खरीफ फसल का ही मूल्य मिलता था अब पूरे रबी सीजन में सब्जियां लगाने से अतिरिक्त अधिक मुनाफा होने लगा है। वहीं एक किसान चंद्रमौली ने बताया की ग्रीन शेड लगा ड्रिप पद्धति से सिंचाई की व्यवस्था कर उन्नत बीज और तकनीक से सब्जियों की खेती चालू की है। लौकी, टमाटर और बरबट्टी की फसल लगाई है। कोरोनाकाल में उन्हें सब्जियों के अच्छे भाव मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है। केराझर के गजानन पटेल भी रबी सीजन में लगभग 5 एकड़ रकबे में उन्नत सिंचाई व्यवस्था के साथ धान व अन्य फसल ले रहे हैं। खेत में धान की फसल पक गई है। अब वे उसकी कटाईकर धान खरीदी केंद्र में बेचने की तैयारी में जुट गए हैं।
साभार: दैनिक भास्कर

