जूतम पैजार और नूरा कुश्ती का अखाड़ा बनता जा रहा धरमजयगढ़ का एक सरकारी दफ्तर
धरमजयगढ़- सुनी-सुनाई यह बात काफी जन चर्चा में है, कि आजकल धरमजयगढ़ के एक सरकारी दफ्तर का परिसर जूतम पैजार व नूरा कुश्ती का अखाड़ा बनता जा रहा है।
वैसे इस कार्यालय भवन की भव्यता तो देखते ही बनती है। शायद इसी वजह से इससे प्रभावित होकर मातहत कर्मचारी आए दिन एक दूसरे की बखिया उधेड़ने पर उतारू हो गये हैं। वो तो भला हो बीच – बचाव करने वालों का जिनके कारण बड़ी से बड़ी बात कैम्पस के अंदर तक ही सीमित हो कर रह जाती है। वरना शेर के खाल में सियार की कहानी याद आने लगती या कहें कि एक से बढ़कर एक छुपे रुस्तमों की सच्चाई चारदीवारी के बाहर नागिन डांस करती दिखाई देती।
शायद आपको अच्छे से याद होगा कि कुछ महीनों (या गलुबान एक साल ) पहले एक सरकारी नुमाइंदे और पत्रकार के बीच गुत्थमगुत्था होने की घटना प्रकाश में आई थी।अब सुनी – सुनाई है, कि बीते बुधवार के दिन दहाड़े दो सरकारी कारिंदे आपस में ही उलझ पड़े। यहाँ तक कि स्थिति जूतम पैजार मल्ल युद्ध तक जा पहुंची।
जाहिर है, आसपास के कुछ लोगों की भलमनसाहत कारगर साबित हुई और रात गई बात गई ,हो गई। अब इसे महज़ अपने घर का मामला बताया जा रहा है। हालांकि कुछ निर्भीक, निडर और साहसी अभी भी दंभ भर रहे हैं, कि संगठित होकर अंगद के पांव की तरहा सालों से यहाँ जमे हम इस अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। अब जाने भी दीजिए साहब संगठित होकर मोर्चा खोलने की झलक देखें तो दशकों बीत गए। खैर, इस बार शायद ईश्वर उनके संगठन को शक्तिऔर मजबूती प्रदान करें। आखिर सालों से एक ही जगह पर कुर्सी का दम निकालने का माद्दा रखने वाले “जहांपनाह बिगड़े शहज़ादे” के खिलाफ मुंह खोलना कोई हंसी मजाक का खेल थोड़ी न है। जो भी हो पर्दे के पीछे का मामला काफी संगीन है, बहर कैफ इब्तिदाये इश्क़ है रोता है क्या…आगे – आगे देखिए होता क्या है ?
अस्वीकरण :- यह लेख सुनी – सुनाई बातों पर आधारित है, अतः किसी से भी किसी भी प्रकार की समानता को संयोग मात्र माना जाए,इस समाचार के साथ सांकेतिक रूप से एक सरकारी कार्यालय का फोटो लगाया गया है ,और समझदारों के लिए इशारा काफी है!
असलम खान की खबर ?

