वॉल पेंटिंग में केमिकल कलर की जगह गोबर, मिट्टी व फूलों का करती है उपयोग, टाटा कंपनी दे रही संवाद फैलोशिप
जशपुर. मनोरा ब्लॉक के छोटे से गांव सैला की रहने वाली सुमंती उरांव का शौक उसकी पहचान बन गई है। वर्तमान में उसकी कला को एथनिक रिसोर्ट में सराहा जा रहा हैै। बालाछापर में बने एथनिक रिसोर्ट में आदिवासी संस्कृति पर जो वॉल पेंटिंग बनाई गई है, वह सुमंती द्वारा ही तैयार की गई है। सुमंती को भले ही उसके मूल निवास वाले जशपुर जिले में कोई ना जानता हो, पर टाटा कंपनी ने उसे संवाद फैलोशिप दिया है। साथ ही सुमंती ने आदिवासी आर्ट के जरिए ओडिशा, झारखंड, केरल, मुंबई, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों के एक्जिवेशन में भी अपनी कला दिखाई है। सुमंती उरांव ने बताया कि उसने वॉल पेंटिंग की कला किसी से सीखी नहीं है। यह शौक है। सुमंती ने कहा कि संस्कृति को चित्रों से व्यक्त करना, आदिवासी परंपरा में जो कलाकृतियां बनाई जाती है, उसे बनाना उसका बचपन से शौक रहा है। आदिवासी अपने घरों की दीवार को विभिन्न कलाकृतियों से सजाते हैं, इसे वह बचपन में बड़े गौर से देखा करती थी। बचपन में वह मिट्टी के दीवारों, चट्टानों और जमीन पर कलाकृतियां बनाया करती थी। उस वक्त उसे यह तक पता नहीं था कि जो वह कर रही है उसे वॉल पेंटिंग कहा जाता है। सुमंती उरांव करीब 12 साल से बाहर रह रही है। सुमंती ने दो साल पहले शहर के हस्तशिल्प विकास बोर्ड के कार्यालय में अपना पंजीयन कराया है। हस्तशिल्प विकास बोर्ड की श्वेता सिंह ने बताया कि सरना एथनिक में सुमंती की टीम ने बेहतर वॉल पेंटिंग की है।
हरे कलर के लिए सेम व काले के लिए गोबर का उपयोग
सुमंती का वॉल पेटिंग की विशेषता यह है कि वह अपनी वॉल पेटिंग में किसी भी तरह के कैमिकल रंगों का उपयोग नहीं करती है। क्योंकि आदिवासी परिवारों में ऐसा नहीं होता है। वह अपनी संस्कृति के अनुसार ही सिर्फ मिट्टी का उपयोग कर एक से बढ़कर एक वॉल पेटिंग करती है। मिट्टी में हरे कलर के लिए वह सेम के पत्ते का उपयोग करती है, काले कलर के लिए गोबर व अन्य रंगों के लिए फूलों का उपयोग करती है।
दूसरे जिलों में उरांव आर्ट की ज्यादा पूछ-परख
सुमंती ने बताया कि वॉल पेटिंग की पूछ-परख अपने जिले में नहीं है। इसलिए वह बीते कई सालों से मध्यप्रदेश के भोपाल में रह रही है। वहां उसने उरांव आर्ट के नाम से अपना काम चालू किया है। जिसमें उसके साथ सहयोगी के तौर पर उसके भाई व बहन हैं। उरांव आर्ट के जरिए वॉल पेटिंग कर आदिवासी संस्कृति को उकेरा जाता है। भोपाल जैसे शहरों में इसकी अच्छी पूछ-परख है। सुमंती ने बताया कि उरांव आर्ट के जरिए उसकी टीम लोक नर्तक दल भी बनाया है। विभिन्न कार्यक्रमों में उसकी टीम आदिवासी परिधान में लोकनृत्य की प्रस्तुती भी देती है।
साभार: दैनिक भास्कर

