रायगढ़. जिला मुख्यालय से लगभग 11 किमी दूर कोड़ातराई में हवाई पट्टी अब आसपास के ग्रामीण के लिए धान की मिसाई करने और सुखाने की जगह बन गई है। यहां किसान धान की ढेरी लगा जाते हैं फिर उसे फैलाकर ट्रैक्टर चलाते हैं। ग्रामीण बारी-बारी से पट्टी का इस्तेमाल करते हैं। लगभग आठ साल पहले यहां हवाई अड्डा बनाने के लिए एमओयू के साथ ही जमीन अधिग्रहण भी शुरू हुआ था। इस हवाई पट्टी में पहले नेता और मंत्रियों के हेलिकॉप्टर उतरते थे लेकिन अब निजी हवाई पट्टी का इस्तेमाल होता है। झारसुगुड़ा में एयरपोर्ट बनने और औद्योगिक मंदी के कारण यहां एयरपोर्ट बनाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
इतनी आगे बढ़ चुकी थी बात
वर्ष 2012 में तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने कोड़ातराई और पुसौर के कुछ हिस्से को मिलाकर नया रायगढ़ और हवाई अड्डा बनाने की योजना बनाई । तब सचिव सह आयुक्त, विमानन एवं मुख्यमंत्री के सचिव सुबोध कुमार सिंह ने 19 अक्टूबर 2012 को कटारिया के साथ कोड़ातराई एयरस्ट्रीप एवं नया रायगढ़ क्षेत्र का निरीक्षण किया था। 23 जुलाई 2013 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और छग सरकार के बीच कोड़ातराई हवाई पट्टी को विकसित करने के लिए रायपुर में एमओयू साइन हुआ था । बताया गया कि इस पर 280 करोड़ रुपए खर्च होंगे। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मौजूदगी में सीएम हाउस में एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया और सरकार के विमानन विभाग के अधिकारियों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के बाद सुबोध सिंह ने बताया था कि पहले फेज में खर्च होने वाले 120 करोड़ में से 50 करोड़ रुपए राज्य सरकार देगी । वहीं सरकार को एयरपोर्ट के विकास के लिए 592 एकड़ जमीन भी मुहैया करानी होगी।
2015 में फिर जगी थी हवाई अड्डे की उम्मीद
22 फरवरी 2015 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया-दिल्ली तथा रायपुर के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा कोड़ातराई हवाई पट्टी में प्रस्तावित हवाई अड्डे का निरीक्षण किया था । इसमें एयरपोर्ट के लिए हवाई यात्रा से संबंधित विभिन्न प्रयोजनों रनवे, लाइटिंग व्यवस्था, टर्मिनल भवन व तकनीकी कक्ष के निर्माण, अहाता का निर्माण, पार्किंग व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, फायर स्टेशन, वीआईपी एवं यात्री कक्ष, विद्युत उपकेन्द्र निर्माण व जरूरी व्यवस्था के लिए प्रस्तावित जमीन का मुआयना किया गया। मगर जमीन अधिग्रहण का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। तब से हवाई सेवा सपना बनकर रह गई।
झारसुगुड़ा एयरपोर्ट बनने के बाद लगभग खत्म हो गई संभावना
सितंबर 2018 में ओडिशा के झारसुगुड़ा में एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही रायगढ़ में एयरपोर्ट शुरू होने की संभावना लगभग समाप्त हो गई। एनटीपीसी और उद्योगों को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट शुरू करने की तैयारी हुई थी। 2016 के बाद से मंदी आ गई, नए उद्योग खुले नहीं, पुराने बंद होने लगे और फिर एनटीपीसी प्लांट से 70 और रायगढ़ से 1.45 मिनट में तय होने वाली 90 किमी की दूरी पर पूर्ण विकसित हवाई अड्डा बन गया, जानकार मानते हैं अब हवाई अड्डे की संभावना कम है। लगभग तीन साल पहले पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने बड़े हैंगर, नाइट लैंडिंग, फ्यूलिंग समेत अन्य जरूरी सुविधा होने के कारण एक निजी एयर स्ट्रिप पर सेवा शुरू करने की बात कही, हालांकि यह भी नहीं हुआ।
साभार: दैनिक भास्कर

