जिले में पॉक्सो एक्ट व गुमशुदगी के मामले ज्यादा, 1142 केस पेंडिंग
रायगढ़. बाल अपराध या बच्चों के प्रति हो रहे अपराधों को रोकने के लिए जिले में गांवों में भी बाल संरक्षण समिति का गठन किया जा रहा है। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत स्तर पर समिति बनाई जा रही है। जिले की 774 ग्राम पंचायतों में सदस्यों का चुनाव समितियों का पुनर्गठन किया जा रहा है। जिले में 13 महीने में ही बाल विवाह समेत बच्चों द्वारा किए गए या उनके साथ हुए 303 अपराध हैं। इसे देखते हुए समिति बनाने पर गंभीरता से काम चल रहा है। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के संरक्षण के लिए जिले में वार्ड और ग्राम पंचायत स्तर पर समिति का गठन किया जा रहा है। इन समितियों के सदस्य उनके आसपास होने वाले अपराधों पर लगाम लगा सकेंगे। आसपास यदि कोई बाल विवाह, बाल श्रम या अन्य कोई बाल अधिकारों के हनन की जानकारी मिलेगी तो वे जिला बाल संरक्षण ईकाई को सूचना देकर कार्रवाई कर सकेंगे। कलेक्टोरेट से सर्कुलर जारी होने के बाद अब नए सदस्यों की बैठक करने की तैयारी की जा रही है। ताकि उन्हें उनके दायित्वों के बारे में जानकारी दी जा सके। जनवरी 2020 से जनवरी 2021 तक बच्चों के अपराध से जुड़े 303 मामले आ चुके हैं। वहीं पुराने मामलों को देखें तो जनवरी 2021 तक की स्थिति में 1142 मामले ऐसे हैं जो बाल कल्याण समिति के पास पेडिंग हैं। जिन पर जांच चल रही है। इसलिए ऐसी समितियां बाल अपराधों पर रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मामले प्रतिशत में
पॉक्सो एक्ट – 50 प्रतिशत
गुमशुदगी – 30 प्रतिशत
बाल विवाह – 20 प्रतिशत
मानव तस्करी – 10 प्रतिशत
ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति
सरपंच-अध्यक्ष
पंचायत सचिव-सचिव
पंचायत के कोई तीन पंच जिसमें एक महिला हो
चयनित मितानिन और पंचायत क्षेत्र के चयनित शिक्षक
महिला स्व सहायता समूह के सदस्य
पंचायत क्षेत्र में निवासरत हाईस्कूल के 1 छात्र व 1 छात्रा
सदस्यों को दायित्वों के बारे में समझाया जाएगा
“आदेश जारी होने के बाद नए सदस्यों को बैठक के जरिए उनके दायित्वों के बारे में समझाया जाएगा। ताकि वे अपने क्षेत्रों में बच्चों की बेहतरी के लिए कार्य कर सके।”
-दीपक डनसेना, जिला बाल संरक्षण अधिकारी
साभार: दैनिक भास्कर

