रायगढ़. ओपन एग्जाम और विद्यार्थियों को देने के लिए जो पुस्तकें मंगाई उन्हें बांटा ही नहीं
पाठ्य पुस्तक निगम ओपन स्कूल के एग्जाम और बड़ी कक्षाओं के स्टूडेंट्स को पुस्तकें उपलब्ध कराता है। शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण पुस्तकें स्टूडेंट्स तक नहीं पहुंच पा रही हैं। ओपन स्कूल परीक्षा का फॉर्म भरने वालों से किताबों के नाम पर लगभग 12 सौ रुपए किताबों के नाम पर लिए जाते हैं। नटवर स्कूल और गर्ल्स स्कूल सेंटर को ओपन स्कूल एग्जाम का सेंटर था। दोनों स्कूल प्रबंधनों ने पुस्तकें दी नहीं। सरकारी स्कूलों में भी विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें दी जानी थीं लेकिन कई जगहों पर किताबें डंप हैं। पहली से दसवीं की भी पुस्तकें स्कूलों में पड़ी है। हर वर्ष पाठ्य पुस्तक निगम से डिपो में पुस्तकें एडवांस में भेजी जाती हैं। इसे बांटने की जिम्मेदारी स्कूल के शिक्षकों की होती है। कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल बंद हैं। ओपन स्कूल और पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों को बांटने के लिए स्कूल प्रबंधनों को निर्देश दिया गया है लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। साक्षरता अभियान के अंतर्गत भी कुछ दिनों पहले रायपुर से पुस्तकें और रीडिंग बुक्स भेजी गई थी। इन्हें हर ब्लॉक में बांटा जाना है। ये पुस्तकें जिला पंचायत के साक्षरता अभियान के कार्यालय के दो कमरों में पिछले डेढ़ महीने से रखी हैं।
काफी पुस्तकें बंट नहीं पाई
“पढ़ने के लिए आजकल बच्चे पुस्तकों पर ध्यान नहीं देते और कुंजी, गाइड की सहायता लेते हैं। इस वजह से विद्यार्थियों ने पुस्तकें ली नहीं। इसके अलावा पाठ्य पुस्तक निगम से पहली से दसवीं तक की पुस्तकें बांटने के लिए कहा गया था। उसमें 10 फीसदी बच्चों को बुक्स नहीं दी जा सकी है। अब स्कूल खुलेंगे तो पुस्तकें काम में आएंगी।”

