रायगढ़. स्वच्छता रैंकिंग 2017 में 104 थी, 2020 में मिला 13वां स्थान, इस बार चुनौती बड़ी
जनवरी 2012 में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए नगर निगम तैयारी में जुटा हुआ है। बेहतर रैंकिंग के लिए निगम अफसर लगातार कर्मचारियों की बैठक ले रहे हैं। नए प्रपोजल बन रहे हैं ताकि शहर को सुंदर बनाया जा सके। हालांकि अब तक जमीन पर तैयारियों का असर नहीं दिख रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण में साल दर साल निगम को बेहतर रैंक मिली है। इस बार अच्छी रैंकिंग के लिए बड़े प्रयास करने होंगे। भास्कर ने सोमवार को शहर और स्वच्छता सर्वेक्षण की जरूरतों पर पड़ताल की।
4 साल में ऐसी रैंकिंग
साल – स्थान
2017 – 104
2018 – 54
2019 – 43
2020 – 13
रैकिंग सुधारने यह है निगम का प्रयास
* रंगरोगन के लिए-23 लाख
* दिशा सूचक लगाने-19.5 लाख
* शहर के बीच गार्बेज प्वाइंट हटाने-9 लाख
* जिला प्रशासन की ओर से 100 नई ट्राइसाइकिल और 100 स्वच्छता दीदी
* इस बार वाटर ++ नया इस पर दिए जाएंगे 700 नंबर
स्वच्छता सर्वेक्षण में वाटर ++ जोड़ा गया है। शहर में नालों से निकलने वाले गंदे पानी को रिसाइकिल किस तरह से किया जाता है। रायगढ़ में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माणाधीन है। फिलहाल इस कैटेगरी में अच्छा स्कोर करने के लिए निगम ने एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लान) के लिए 1.2 करोड़ रुपए का प्रपोजल बनाकर भेजा है। अफसर कहते हैं यह दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।
शहर की इन सड़कों के किनारे कचरे का ढेर
* कलेक्टोरेट के पीछे बाल मछली पालन विभाग के पास
* ढिमरापुर चौक में उर्दना रोड की तरफ
* रामनिवास टॉकीज के सामने
*जहां पेंटिंग कराई वहां थूक रहे हैं लोग
* पहले जिस पर ज्यादा नंबर मिले, वहीं ढिलाई
पिछले साल निगम को सर्वे में एसएलआरएम में वेस्ट मैनेजमेंट, कम्यूनिटी और पब्लिक टॉयलेट, सिटीजन फीडबैक, सहित कई मामले में अच्छे नंबर मिले थे। इन कामों में अब निगम पिछड़ गया है। पिछली बार टीम के आने से पहले अस्थायी व्यवस्था कर नंबर पा लिए थे। इस बार सर्वेक्षण टीम डायरेक्ट ऑब्जरवेशन के अलावा लोगों से सीधे फीडबैक लेकर अंक देगी।
ये सेवाएं बेहतर करनी होंगी निगम को
- डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन – 48 वार्डों में कचरा कलेक्शन कमजोर। निगम के पास 316 महिला कर्मी और 150 रिक्शा हैं। 10 एसएलआरएम सेंटर हैं।
- नाली-नालों की सफाई- बड़े नालों की सफाई हर साल कराई जाती है लेकिन शहर में 60 प्रतिशत नालियों की सफाई नहीं हो रही है।
- ओडीएफ – शहर के भीतर बने पब्लिक और कम्यूनिटी टायलेट खराब या गंदे हैं। टीम अगर लोगों से फीडबैक लेती है तो रैंकिंग खराब होगी।
- कचरे का निबटान – कचरे के निबटान में निगम पीछे है। गीले कचरे को खाद बनाकर उसका उपयोग करना है। अभी ज्यादातर एसएलआएम सेंटर में पिट तैयार नहीं हैं। आसपास के गड्ढों में कचरा फेंका जाता है।
- यूजर चार्ज – निगम 42% यूजर चार्ज वसूल रहा है जबकि 90% का लक्ष्य है। इसका सीधा जुड़ाव डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन से है।
बेहतर रैंकिंग के लिए तैयारी पूरी है, कई काम हो रहे हैं
“इस बार जिला प्रशासन और निगम दोनों ही शहर को बेहतर स्थान तक ले जाने का प्रयास कर रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर कई तरह के प्रपोजल बनाए गए हैं। इस बार यकीनन पहले से बेहतर स्थान पर रायगढ़ होगा। बस लोगों की जागरूकता जरूरी है। हम काम करा रहे हैं लेकिन लोगों को भी शहर को सुंदर रखने सहभागी बनना पड़ेगा।”
-आशुतोष पांडेय,आयुक्त, नगर निगम
साभार: दैनिक भास्कर

