पिछले साल नवंबर में 10 रुपए किलो था वह अब 30 रु. किलो बिक रहा
पत्थलगांव. सरकार के मक्का बीज को समर्थन मूल्य पर खरीदने के एलान से किसानों ने कम ही क्षेत्र में टमाटर की खेती की। बाजार में आवक कम होने से टमाटर उत्पादक किसानों को उसका सही दाम मिलने लगा है। पिछले साल नवंबर में दस रुपए किलो बिकने वाला टमाटर इस बार तीस रुपए प्रति किलो बिक रहा है। मक्के का समर्थन मूल्य तय होने का लाभ मक्का और टमाटर की फसल लेने वाले किसानों को मिलेगा। मक्का को समर्थन मूल्य पर खरीदने का एलान के कारण किसान टमाटर का रकबा घटाकर खेतों में मक्के की फसल लगाए थे। अनुकूल जलवायु रहने के कारण इस वर्ष दोनों ही प्रकार की खेती बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं। किसानों को भरपूर मात्रा में मक्के की पैदावार हुई, वहीं कम रकबा में टमाटर लगाने से किसानों को अब उचित दाम भी मिल रहा है। सुसडेगा से आए किसान हमील तिर्की ने बताया कि पिछले साल उन्होंने पांच एकड़ में टमाटर की फसल लगाई थी। पिछले वर्ष टमाटर का भाव मात्र 400 से 500 रुपए प्रति भार मिल रहा था, वहीं लोकल मंडी में खुदरा दर पर टमाटर दस रुपए किलो बिका। इस साल मक्का को समर्थन मूल्य पर खरीदने की घोषणा के बाद उन्होंने दो एकड़ में ही टमाटर की फसल लगाई। इसी तरह बांकी किसानों ने भी रकबा घटाकर टमाटर की फसल लगाई है। जिससे स्थानीय मंडी में टमाटर की आवक कम है। कम आवक के कारण कोचिए किसानों की फसल को हाथों हाथ खरीदकर मुंह मांगी रकम दे रहे है।
पहली की अपेक्षा अधिक मात्रा में मक्के की खेती
त्रिसोंठ से आए किसान सुखदेव महंत ने बताया कि किसान इस बार टमाटर की फसल के अलावा मक्के की फसल अधिक मात्रा में लगाएं हैं। एक ओर जहां मंडी मे उन्हें टमाटर की फसल का उचित दाम मिल रहा है, वहीं सोसायटी में मक्का बीज बेचकर समर्थन मूल्य प्राप्त करेंगे। पिछले साल घाटा खाए किसान अपनी दोनों ही फसल मुनाफे में बेचकर नफा कमा सकेंगे।
मिश्रित खेती करने से किसान हुए मालामाल
लुडे़ग से टमाटर बेचने आए किसान मोहन भगत ने बताया कि कृषक अब शासन की योजना का भरपूर लाभ लेने लगे हैं। उन्होंने बताया कि एक प्रकार की खेती से नुकसान होता था। इस कारण किसान अब मिश्रण खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टमाटर, मक्का के अलावा किसान इस बार सब्जी भाजी भी भरपूर मात्रा मे लगाए हैं। जिसका लाभ किसानों को मिलने लगा है।
साभार: दैनिक भास्कर

