रायगढ़. मनरेगा, पीएम जनधन योजना, किसान मानधन, धान बोनस का भुगतान सहित पैसे जमा कराने की मिली सुविधा
आपका बैंक आपके द्वार योजना के तहत बैंक सखियों ने 26.46 करोड़ रुपए लोगों तक पहुंचाए है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत जिले में कार्यरत बीसी (बैंक कॉरेस्पॉन्डेट) सखियों ने पिछले 8 माह में लोगों तक पहुंचकर, उनके घर-घर जाकर आधार बेस्ड बैंकिंग सेवाएं के तहत 26.46 करोड़ का भुगतान व लेनदेन किया है। जिनमें विभिन्न योजनाओं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री जनधन योजना, किसान मानधन, धान बोनस के भुगतान के साथ ही खातों में पैसे जमा करने व आहरण के साथ ही पंचायत कर्मियों के वेतन का उनके खाते से भुगतान किया है। इस दौरान 1 लाख 43 हजार 105 ट्रांजेक्शन बैंक सखियों द्वारा किए गए हैं। बिहान के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन बीसी सखी के रूप किया गया है। वर्तमान में जिले के 9 विकासखंडों में 145 बीसी सखियां जिले के सुदूर इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने व अधिक से अधिक लोगों को बैंकिंग गतिविधियों से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। जिले में बीसी सखियों ने अप्रैल से अब तक कुल 26 करोड़ 46 लाख 36 हजार 158 रुपए का ट्रांजेक्शन किया है। जिसमें पेंशन व अन्य योजनाओं के अंतर्गत भुगतान के अलावा 5 करोड़ 23 लाख 40 हजार 116 का बैंकिंग लेनदेन के तहत भुगतान भी किया गया है। जिसमें लोगों के खातों में 1 करोड़ 84 लाख 66 हजार 733 रुपए जमा किए तथा खाता धारकों के एकाउंट से 3 करोड़ 38 लाख 73 हजार 383 रुपए का भुगतान बीसी सखियों द्वारा उन्हें किया गया। बीसी सखियों द्वारा मनरेगा के अंतर्गत 2 करोड़ 63 लाख 87 हजार 761 रुपए का भुगतान भी कार्यस्थल पर ही पहुंचकर किया।
बैंकिंग सुविधाओं के साथ रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
यह ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग गतिविधियों को बढ़ाने के साथ ही महिला रोजगार व सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की एक मजबूत पहल है। प्रत्येक ट्रांजेक्शन के एवज में बीसी सखियों को एक निश्चित कमीशन मिलता है। बीसी सखियां अपने साथ लैपटॉप व फोन से कनेक्ट होने वाले बायोमेट्रिक मोफोस डिवाइस लेकर लोगों के घर-घर जाकर उनकी राशि का भुगतान करती हैं। कोरोनाकाल में जब लॉकडाउन के समय भी बैंक सखियों ने अच्छा काम किया था। लोगों को घर बैठे ही उनके पैसे मिले। जिससे लॉकडाउन के दौरान रोजमर्रा की जरूरतों के साथ इलाज आदि में खर्च के लिए लोगों को सहुलियत हुई और उन्हें बैंकों तक जाने की जरूरत ही नहीं पड़ी।
साभार: दैनिक भास्कर

