नई सोसाइटियों में काम अधूरा, तो कही नींव तक नहीं बन सका
रायगढ़. एक दिसंबर से धान खरीदी शुरू होगी। शुक्रवार से खरीदी के लिए टोकन कटना शुरू होना था, लेकिन खरीदी के लिए बना साफ्टवेयर अपडेट नहीं होने से कही भी टोकन नहीं कट पाया है। इससे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। तकनीकी समस्या कब तक दूर होगी, यह सहकारिता विभाग के अधिकारी नहीं बता पा रहे है। शुक्रवार से जो टोकन कटना था, उससे किसान सात दिन के अंदर कभी भी अपना धान बेच सकते थे। इसके लिए राज्य सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन भी जारी किया है। नई सोसाइटियों गठन होने के बाद किसानों के नाम पुराने सोसाइटियों से नए में ट्रांसफर करना है। पहले साफ्टवेयर में किसानों के नाम छांटकर अलग करने थे। उसके बाद साफ्टवेयर में उनके नामों की इंट्री या डाटा अपलोड करने का काम ऑफलाइन किया जाता था, लेकिन अब यह काम ऑनलाइन में किया जाना है। इसलिए भी इस काम को करने में थोड़ी परेशानी सामने आ रही है। सोसाइटी से जुड़े मैनेजर कहना हैं कि किसानों को तीन टोकन इश्यू होगा। बड़े किसानों को एक टोकन निरस्त होता है तो एक विकल्प खत्म हो जाता है। दो टोकन में ही उसे धान बेचने का मौका मिलेगा। इसमें उन्हें दिक्कत हो सकती। इसलिए टोकन कटाने को लेकर किसान एतिहात बरत रहे है।
नई समितियों में धान खरीदी की व्यवस्था नहीं
जिन पंचायतों में नए धान खरीदी केंद्र बनाए गए हैं, वहां पर खरीदी के लिए कोई इंतजाम भी नहीं हो पाए हैं। जिले में 26 नवीन समितियां बनाई गई है, इससे जुड़े एक-एक गांव में भी खरीदी केन्द्रों को इससे जोड़ा गया है। इन जगहों में अभी चबूतरा का निर्माण कर लिया गया है, लेकिन खरीदी के लिए कंप्यूटर व कर्मियों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। खरसिया के भूपदेवपुर के सोसाइटी में शुक्रवार को चबूतरा निर्माण के बाद खरीदी की व्यवस्था की गई।
साॅफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है, थाेड़ा समय लगेगा
“धान खरीदी का साफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है, रायपुर स्तर पर इसका काम चल रहा है। इसलिए टोकन शुक्रवार से नहीं कट पाया है। साफ्टवेयर ठीक करने में थोड़ा समय लग रहा है। कब तक ठीक होगा यह अभी कह पाना मुश्किल है।”
-सुरेन्द्र गौड़, सहायक पंजीयक
साभार: दैनिक भास्कर

