आईसीएमआर ने रेमडेसिवीर को बताया बेअसर, जिले में भी खराब रहा प्रदर्शन
रायगढ़. कोविड अस्पताल के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती गंभीर कोविड मरीजों को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिवीर लगाया जा रहा है। आईसीएमआर और डब्ल्यूएचओ ने अब इस दवा को कोरोना के इलाज के लिए बेअसर बताया है। जिले में इसके इस्तेमाल और असर पर नजर डालें तो इसकी पुष्टि होती है। कोविड अस्पताल में मरने वाले 155 लोगों में 110 से अधिक लोगों को दी गई थी। कुछ लोगों को यह इंजेक्शन मुफ्त मिला जबकि ज्यादातर मरीज के परिजन को यह खर्च उठाना पड़ा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च के सॉलिडेरिटी ट्रायल में रेमडेसिवीर को बेअसर पाया गया है। इसी तरह डब्ल्यूएचओ (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन) ने भी इसे कोरोना के इलाज में कारगर नहीं बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना मरीजों के इलाज में इसका कोई ज्यादा लाभ नहीं है। जिले में हर दूसरे गंभीर मरीज को ऑक्सीजन की कमी होने पर रेमडेसिवीर एंटी वायरल ड्रग दिया गया। लेकिन यह प्रभावी कम रहा। आंकड़े के अनुसार कोविड अस्पताल में 1185 मरीजों में आधे से ज्यादा गंभीर थे, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। गंभीर मरीजों को जल्दी रिकवरी के उद्देश्य से रेमडेसिवीर दी गई। कुल 600 से अधिक लोगों यह दवा दी गई। लोगों को भी यह दवा दी गई तो उनके मार्केट रेट के हिसाब से लगभग दो करोड़ और सरकारी कीमत के मुताबिक एक करोड़ 80 हजार रुपए से ज्यादा खर्च हो गए, लेकिन लाभ मरीज और उसके परिजन को नहीं मिला। निजी अस्पतालों में इस इंजेक्शन का इस्तेमाल ज्यादा हुआ है।
कोविड अस्पताल में यह रहा कोरोना मरीजों का हाल
अभी तक मरीज – 1185
मौत के आंकड़े – 155
डिस्चार्ज मरीजों की संख्या – 835
6 से 8 इंजेक्शन का डोज लगता है एक मरीज को
डॉक्टरों के अनुसार मरीज को 6 से 8 इंजेक्शन के रूप में डोज पूरी करनी होती है। शासकीय अस्पताल में तो इसकी कीमत 2800 रुपए है। लेकिन प्राइवेट मेडिकल में एक इंजेक्शन की कीमत 5400 रुपए तक है। प्रशासन ने दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए थे कि इस दवा की कीमत कम वसूली जाए, इसके बावजूद दवा दुकानों पर 5 हजार से 5400 रुपए में इंजेक्शन बेचा गया।
गंभीर मरीजों के फेफड़े सबसे ज्यादा डैमेज
गंभीर मरीजों के फेफड़े सबसे ज्यादा डैमेज हो रहे हैं। डॉ. वेद प्रकाश घिल्ले के अनुसार फेफड़ों के खराब होने के कारण ही लोगों को ऑक्सीजन मिल पाने में दिक्कत होती है, इससे रिकवरी भी देर से हो रही थी। बॉडी में वायरस ज्यादा नुकसान ना पहुंचाए। इसलिए रेमडेसिवीर या कोई भी दवा दी जाती है। ताकि नुकसान कम हो, मरीज जल्दी रिकवर करे।
गंभीर मरीजों को ही दिया जाता है रेमडेसिवीर इंजेक्शन
“ज्यादा गंभीर होने पर ही मरीजों को जल्दी रिकवरी के लिए रेमडेसिवीर इंजेक्शन दिया जाता है। रेमडेसिवीर और ऑक्सीजन देने को लेकर शासन द्वारा गाइडलाइन बनाई गई है। जिसे जैसी जरूरत होती है वैसा ही उपचार किया जाता है।”
-डॉ. आनंद मसीह लकड़ा, आईसीयू प्रभारी, कोविड अस्पताल
साभार: दैनिक भास्कर

