7 साल बाद भी डेम की नहरें नहीं बनीं, तीन गैर जरूरी कामों पर खर्च कर दिए करोड़ों रुपए
रायगढ़. केलो डेम पूरा होने के 7 साल बाद भी भले ही सारी नहरें पूरी नहीं हो पाई हों लेकिन तीन साल में विभाग ने जलाशय के आसपास खूबसूरती बढ़ाने के नाम पर 22 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। पार्क चार साल से बनाया जा रहा है, लेकिन इसे खोला नहीं जा रहा है। मुख्य नहर को संवारने के नाम पर लाखों रुपए के पत्थर लगाए गए। यह भी अब जंगल में बदल गए। केलो डेम से लगे इकोलॉजिकल पार्क के बाद पार्क से जुड़े पुरानी नदी के हिस्से को फिर से 6 करोड़ 80 लाख रुपए से तैयार किया गया। तकनीकी खामियों के कारण पार्क बनने से पहले ही हर साल यहां पानी के कारण सामान बर्बाद हो जाते हैं। लोगों को लुभाने के लिए जो कुछ भी बनाया गया वह बैक वाटर के कारण खराब हो गया। यह समस्या हर साल रहेगी। इसलिए पार्क खुल नहीं पा रहा है। पिछले साल ही खोला जाना था लेकिन बारिश के कारण बनाए गए आर्ट खराब हो गए। अब विभाग इसे गर्मी में खोलने की बात कह रहा है ताकि पानी म रहे।
अधूरा काम के कारण नहीं हो पाया पहाड़ों का सौंदर्यीकरण
लाखा के पास पहाड़ों को बांधने के लिए 5.65 करोड़ रुपए में काम कराया गया। एक काम कृष्णापुर के पास 10.43 करोड़ में कराया। विभाग ने दोनों ही काम एक ही ठेकेदार को 50 प्रतिशत से अधिक ऊपर दर पर देकर कराया। दोनों ही काम घटिया स्तर के हुए। मौके पर कॉकपिट की जालियां दिख रही हैं जिस पहाड़ को तीन इंच मोटी सीमेंट की परत चढ़ाई गई थी। उसमें पौधे उगे हुए हैं। जो कांक्रीट को समय के साथ खत्म करते हुए अपनी जगह बना रहे हैं। इसी तरह मौके पर ही कुछ स्पॉट ऐसे हैं। जो खराब हो गए हैं। झाड़ी के कारण यह भी जंगल में तब्दील होते जा रहा है।
प्रोजेक्ट के बारे में जवाबदेही से बच रहे हैं स्थानीय अफसर
केलो प्रोजेक्ट में बीते तीन सालों से पीके शुक्ला कार्यपालन अभियंता हैं। उक्त दर्शाए कार्य सभी इन्हीं के समय में हुए हैं। इसलिए ये प्रोजेक्ट के बारे में किसी भी सवाल से बचने की कोशिश करते हैं। भारी भरकम खर्च और उसके नतीजे पर किसी भी सवाल का ये अफसर जवाब नहीं देना चाहते हैं।
नहर किनारे बैंक को सजाने लगाए 80 लाख के कीमती पत्थर
दो साल पहले पत्थलगांव मार्ग से जुड़ी मुख्य नहर के हिस्से को संवारने के लिए 80 लाख रुपए खर्च करके हार्ड स्टोन लगाए गए। अफसरों ने बताया कि इससे मिट्टी का कटाव रुकेगा और नहर की खूबसूरती भी बढ़ेगी। लेकिन एक साल बाद ही हार्ड स्टोन पर झाड़ियां उग आईं। अब स्थिति यह है कि नहर किनारे जिस बैंक को झाड़ियों और पानी से बचाने हार्ड स्टोन लगाया गया था। यहां अब केवल मिट्टी से भरे हुए जंगल बाकी है। इसी तरह डेम के भी कुछ हिस्सों में हार्ड स्टोन लगाए गए हैं। जो अभी सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय अफसरों को जवाब देना चाहिए
“मैं दिखवाता हूं। फिलहाल विधानसभा के सवालों के जवाब तैयार करने में ज्यादा व्यस्त हूं। स्थानीय अफसरों को जवाब देना चाहिए।’’
–आईजे उईके, चीफ इंजीनियर, हसदेव गंगा बेसिन
साभार: दैनिक भास्कर

