पहले पेड़ से तोड़ 40 रुपए किलो बेचतेे थे, अब प्रोसेसिंग के बाद 800 रुपए किलो बिक रहा काजू
जशपुर. पूरे देश में ट्राइब्स इंडिया के रिटेल आउटलेट्स का एक नेटवर्क स्थापित किया है। इसमें लगी दुकानों में आदिवासी समुदायों के सबसे उत्तम उत्पाद, दस्तकारी जनजातीय कला और शिल्प का व्यापक प्रदर्शन किया जाता हैं। ट्रायफेड के इस आउटलेट में जशपुरिया काजू को शामिल करने के लिए एग्रीमेंट हो जाता है तो जशपुरिया काजू पूरे देश में बिकेगा। जशपुर के काजू ने उत्पादक किसानों की जिंदगी को बदलकर रख दिया है। बीते कई दशकों से किसान काजू की खेती से तो जुड़े थे लेकिन यह खेती सिर्फ उनकी अतिरिक्त आय का जरिया थी, क्योंकि उस वक्त वे काजू को बगैर प्रोसेस किए 40 रुपए किलो के भाव में स्थानीय सेठ साहूकारों को बेच दिया करते थे। तीन साल पहले तक काजू उत्पादक किसान परिवार की आजीविका चलाने के लिए धान सहित अन्य फसलों का उत्पादन करते थे, पर अब काजू से ही किसानों की इतनी कमाई हो जा रही है कि किसान दूसरी फसल लगा भी रहे हैं तो सिर्फ शौक से। दुलदुला विकासखंड के कई गांव में रबी के सीजन में इस वक्त कोई भी फसल नहीं लगी है। खेत खाली पड़े हैं और किसान धान की परंपरागत खेती का काम पूरा कर अब काजू की प्रोसेसिंग में जुट गए हैं, क्योंकि काजू ही अब उनकी सालाना आमदनी का बड़ा हिस्सा है। 2017 से पहले ऐसा नहीं था। उस वक्त तक किसान काजू पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया करते थे, क्योंकि इससे उन्हें कुछ खास कमाई नहीं दिखाई पड़ती थी।
प्रोसेसिंग यूनिट ने किसानों को दिलाई सही कीमत
2018 में तात्कालीन कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला ने जिला खनिज एवं न्यास निधि से चरईडांड़ के पास काजू प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना कराई थी। उन्हें जब पता चला कि जशपुर जिले में काजू की खेती होती है और किसान इसे 40 रुपए में बेचते हैं तो वह चौंक गईं थी। इसके बाद काजू का पूरा फायदा किसानों को दिलाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। किसानों का पंजीयन शुरू हुआ तो इस यूनिट से 7800 किसान जुड़े। किसानों ने अपनी बाड़ी में लगे काजू को सेठ साहूकारों को बेचना बंद किया और इसे प्रोसेसिंग यूनिट में लाने लगे। एक्सपर्ट की टीम ने आकर ग्रामीणों को ही प्रोसेसिंग की पूरी ट्रेनिंग दी और यहां से काजू प्रोसेस होकर पैकेट्स में बंद बाजार तक पहुंचे। यहां से किसानों की जिंदगी में बदलाव शुरू हुआ और अब किसान तरक्की की राह पर हैं।
प्रति एकड़ हो रही 40 हजार रुपए की कमाई
काजू का उत्पादन व बिक्री सहयोग ग्रीन प्लस आदिवासी सहकारी समिति के माध्यम से की जा रही है। राजेश गुप्ता ने बताया कि एक पौधे से 6 किलो तक काजू अब निकल रहा है। प्रति एकड़ 360 किलो काजू का उत्पादन हो रहा है और प्रति एकड़ किसान 40 हजार रु. तक की कमाई अासानी से कर ले रहे हैं। वर्तमान में जशपुरिया काजू जिलेभर के किराना दुकानों में आसानी से उपलब्ध है। इसके अलावा संजीवनी विक्रय केन्द्र व नाबार्ड की दुकान पर भी काजू लोगों को मिल रहा है।
दूसरे शहरों में भी हो रही काजू की सप्लाई
जशपुर के अलावा प्रदेश के दूसरे शहर रायपुर, रायगढ़, दिल्ली तक जशपुर का काजू जा रहा है। जशपुर के काजू की खासियत यह है कि प्रोसेसिंग के वक्त इसका ऑयल नहीं निकाला जाता है। इससे इसमें पौष्टिकता ज्यादा आती है। जशपुरिया काजू को अब ट्रायफेड के आउटलेट के माध्यम से देश भर में बेचा जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है।
साभार: दैनिक भास्कर


