पत्थलगांव । पत्थलगांव क्षेत्र समेत जिले भर में अहोई अष्टमी का पर्व रविवार को पूरे श्रद्धापूर्वक से मनाया गया। यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। यह करवा चौथ की तरह ही महिलाएं इस दिन अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखतीं है।

इस व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य एवम संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। आज दोपहर से ही महिलाओं ने नए वेशभूषा धारण कर मंदिरों, और घरों में चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गेरूआ से स्याहू माता व उसके सात पुत्रों का चित्र दीवार व घर पर अहोई माता की तस्वीर रखकर मिट्टी की छोटी मटकी या करवे में स्याहु माला लगाकर जल भरा जाता है। तत्पश्चात अहोई माता का पूजन कर कथा के पश्चात प्रसाद का भोग लगाया। यह व्रत कथा एवं आरती के बिना अधूरा माना जाता है। कथा के समय हाथों में 7 प्रकार के अनाज के दानों को लेकर कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसमें शाम होने के पश्चात देर रात्रि तारों को अर्घ्य देकर पारण किए जाने की परंपरा है।


